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नग़मा: माँ की ममता

22 22 22 22 22 22 22

माँ की ममता सारी खुशियों से प्यारी होती है
माँ तो माँ है माँ सारे जग से न्यारी होती है

मैंने शीश झुकाया जब चरणों में माँ के जाना
माँ के ही चरणों में तो जन्नत सारी होती है

दुनिया भर की धन दौलत भी काम नहीं आती जब
माँ की एक दुआ तब हर दुख पे भारी होती है

माँ से ही हर चीज के माने माँ से ही जग सारा
माँ ख़ुद इक हस्ती ख़ुद इक ज़िम्मेदारी होती है

और बताऊँ क्या मैं तुमको आज़ी माँ की महिमा
माँ से ही जग जन्मा है माँ अवतारी होती है

इन सांसों और इस प्रकृति का सार यही है मौला
माँ से ही माँ जन्मे रोज़ चमत्कारी होती हैै

मौलिक व अप्रकाशित

आज़ी तमाम

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Comment by Aazi Tamaam on May 20, 2021 at 1:36pm

हौसला अफ़ज़ाई के लिये सहृदय शुक्रिया आ बृज जी

सादर

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on May 19, 2021 at 5:40pm

बहुत ही खूबसूरत लिखा भाई तमाम जी...बधाई

Comment by Aazi Tamaam on May 13, 2021 at 2:07pm

सादर प्रणाम आ विनय जी

सहृदय शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई का

Comment by विनय कुमार on May 12, 2021 at 11:16am

बेहद खूबसूरत और बेहतरीन नगमा, माँ के लिए जो लिखा जाए वह कम है. बहुत बहुत बधाई आ अज़ीज़ तमाम साहब

Comment by Aazi Tamaam on May 10, 2021 at 5:13pm

सादर प्रणाम आ धामी सर जी

सहृदय शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाय व मार्गदर्शन के लिये

सर मुझे कुछ अच्छा सूझ नहीं रहा है अगर कुछ अच्छा ज़हन में आता है तो अवश्य कोशिस करूँगा

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 10, 2021 at 11:26am

आ. भाई आज़ी तमाम जी, अभिवादन। अच्छा नगमा हुआ है । हार्दिक बधाई। अंतिम दोनों पंक्तियो में लय (गेयता) बाधित हो रही है । बदलाव का प्रयास करे। सादर..

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