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(ग़ज़ल) इन्साफ़ बेचते हैं फ़ैज़ान बेचते हैं

221 - 2122 - 221 - 2122

इन्साफ़ बेचते हैं फ़ैज़ान बेचते हैं 

हाकिम हैं कितने ही जो ईमान बेचते हैं 

अज़मत वक़ार-ओ-हशमत पहचान बेचते हैं 

क्या-क्या ये बे-हया बे-ईमान बेचते हैं  

मअ'सूम को सज़ा दें मुजरिम को बख़्श दें जो 

आदिल कहाँ के हैं वो इरफ़ान बेचते हैं 

घटती ही जा रही है तौक़ीर अदलिया की 

जबसे वहाँ के 'लाला' 'सामान' बेचते हैं 

उनके दिलों में कितनी अज़मत ख़ुदा की होगी 

पत्थर तराश कर जो भगवान बेचते हैं 

क़ानूनी चारा-जोई मज़लूम की हो कैसे  

वुकला हुनर का महँगा फ़ैज़ान बेचते हैं 

पेशा ही बन गया है झूटी गवाही जिनका

सिक्कों के बदले में वो ईमान बेचते हैं 

मंदिर तो न्याय का है इन्साफ़ ही नहीं बस

ख़ुद 'देवता' यहाँ के फ़ैज़ान बेचते हैं 

कमज़र्फ़ 'अमीर' जब से बनने लगे हैं मुंसिफ़

मिलते ही अच्छी क़ीमत फ़रमान बेचते हैं 

"मौलिक व अप्रकाशित" 

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Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on December 22, 2021 at 4:48pm

मुहतरम समर कबीर साहिब आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद, ज़र्रा नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से शुक्रिया।  सादर।

Comment by Samar kabeer on December 22, 2021 at 2:25pm

जनाब अमीरुद्दीन 'अमीर' साहिब आदाब, अच्छी ग़ज़ल कही आपने, बधाई स्वीकार करें ।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on December 15, 2021 at 3:34pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से शुक्रिया।  सादर।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 15, 2021 at 12:27pm

आ. भाई अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन। बेहतरीन गजल हुई है । हर शेर वर्तमान सच्चाई लिए है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on December 13, 2021 at 4:48pm

आदरणीय तेजवीर सिंह जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से शुक्रिया जनाब। सादर। 

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on December 13, 2021 at 4:46pm

आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से शुक्रिया। सादर ।

Comment by TEJ VEER SINGH on December 13, 2021 at 11:10am

हार्दिक बधाई आदरणीय अमीरुददीन 'अमीर' साहब जी। लाजवाब ग़ज़ल

पेशा ही बन गया है झूटी गवाही जिनका

सिक्कों के बदले में वो ईमान बेचते हैं ।

Comment by Shyam Narain Verma on December 13, 2021 at 10:00am
नमस्ते जी, बहुत ही सुंदर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर

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