For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

धनी बसे परदेश में, जनधन सदा समेट।
ढकते निर्धन  लोग यूँ, यहाँ  पाँव से पेट।१।
*
कीचड़ में जब हैं सने, पाँव तलक हम दीन।
राजन  के  प्रासाद  का, क्या  देखें कालीन।२।
*
नेताओं की हर सभा, फिरे बजाती आज।
यूँ जनता है झुनझुना, भले वोट का नाज।३।
*
ऊँचे  आलीशान   हैं,  नेताओं  के  गेह।
दुहरी जिनके बोझ से, हुई देश की देह।४।
*
गूँगे बहरे लोग  जब, भरे  पड़े इस देश।
कैसे बदले बोलिए, अपना यह परिवेश।५।
*
सुख के दिन दोगे बहुत, कहते तो थे भूप।
हमें पेड़ की छाँव में, क्यों लगती पर धूप।६।
*
सच है या अफ़वाह है, राजन सुख की बात।
हम तक तो आते रहे, बस दुख के दिन रात।७।
*
मौलिक/अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

Views: 567

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 22, 2021 at 2:08pm

आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार।

Comment by Samar kabeer on December 21, 2021 at 8:59pm

जनाब लक्ष्मण धामी जी आदाब, अच्छे दोहे रचे आपने, बधाई स्वीकार करें ।

'सच है या अफ़वाह है, राजन सुख की बात'

इस पंक्ति में 'अफ़वाह' शब्द में 'फ' के नीचे नुक़्ता देख कर ख़ुशी भी हुई और आश्चर्य भी ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 15, 2021 at 10:10pm

आ. भाई अमीरुद्दीन जी, पुनः उपस्थिति के लिए आभार..

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 15, 2021 at 10:09pm

आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति व उत्साहवर्धन के लिए आभार।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on December 15, 2021 at 10:00pm

//गूँगे बहरे लोग जब, भरे पड़े इस देश।//

बढ़िया परिमार्जन। पुन: बधाई। 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 15, 2021 at 9:17pm

आ. भाई अमरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति व सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद। लोग शब्द मूलतः बहुबचन है।  इंगित दोहे में वाक्य विन्यास गड़बड़ा गया है इसलिए लय भंग हो रही है। इसे इस प्रकार से देखें - 

गूँगे बहरे लोग जब, भरे  पड़े  इस  देश।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on December 15, 2021 at 7:03pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब अच्छे दोहे हुए हैं हार्दिक बधाई।

गूँगे बहरे लोग से, भरा पड़ा जब देश।

कैसे बदले बोलिए, अपना यह परिवेश।... इस दोहे के प्रथम चरण में 'लोग' शब्द उचित नहीं है, और 'लोगों' करने से मात्रा भार ग़लत हो रहा है, 

'गूँगे बहरों से भरा, हुआ पड़ा जब देश।'    सादर।

Comment by TEJ VEER SINGH on December 15, 2021 at 12:21pm

हार्दिक बधाई आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी।बेहतरीन दोहा सप्तक।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
3 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
4 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
4 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
4 hours ago
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Jul 24
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service