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हमें लगता है हर मन में अगन जलने लगी है अब

१२२२/१२२२/१२२२/१२२२


बजेगा भोर का इक दिन गजर आहिस्ता आहिस्ता 
सियासत ये भी बदलेगी मगर आहिस्ता आहिस्ता/१
*
सघन  बादल  शिखर  ऊँचे  इन्हें  घेरे  हुए  हैं पर
उगेगी घाटियों  में  भी  सहर आहिस्ता आहिस्ता/२
*
हमें लगता है हर मन में अगन जलने लगी है अब
तपिस आने लगी है जो इधर आहिस्ता आहिस्ता/३
*
हमीं  कम  हौसले  वाले  पड़े  हैं  घाटियों  में  यूँ
चढ़े दिव्यांग वाले भी शिखर आहिस्ता आहिस्ता/४
*
अभी दुत्कारते  हो  पर  समझ तब मोल पाओगे
किनारा जब करेगा ये सिफर आहिस्ता आहिस्ता/५
*
न दुहरा बोझ करके हो पड़ी जो बोरियाँ दुख की 
उन्हें मूसक के जैसा तू कतर आहिस्ता आहिस्ता/६
*
न अब वो लौटने  वाला  बहा  मत  आँख से आँसू 
किया मजबूत हमने भी जिगर आहिस्ता आहिस्ता/७
*
न लौटे जाने वाले जब नगर की ओर तज इसको
हुआ है गाँव अपना भी नगर आहिस्ता आहिस्ता/८
*
न समझो मान  है  चुप्पी  दरीचे उठ नहीं सकते
खुलेंगे पीठ पीछे सब अधर आहिस्ता आहिस्ता/९
*
भले ही नून  कंकड़  शूल  पथ  में  आपने ने डाले
'मुसाफिर' तय करेगा ये सफर आहिस्ता आहिस्ता/१०
*
मौलिक/अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 17, 2021 at 8:48pm

आ. भाई बृजेश जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए धन्यवाद।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on December 17, 2021 at 8:21pm

वाह वाह आदरणीय धामी जी बड़ी ही खूबसूरत ग़ज़ल कही....बधाई

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 10, 2021 at 10:43pm

आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन। गजल पर आपकी उपस्थिति और स्नेह के लिए आभार । टंकण त्रुटि की ओर ध्यान दिलाने के लिए धन्यवाद।

Comment by Samar kabeer on December 10, 2021 at 3:10pm

जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें ।

'तपिस आने लगी है जो इधर आहिस्ता आहिस्ता'

इस मिसरे में 'तपिस' को "तपिश" लिखना उचित होगा ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 9, 2021 at 1:30pm

आ. भाई श्यामनारायण जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद.

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 9, 2021 at 1:30pm

आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद.

Comment by Shyam Narain Verma on December 9, 2021 at 11:03am
नमस्ते जी, बहुत ही सुंदर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर
Comment by TEJ VEER SINGH on December 8, 2021 at 4:22pm

हार्दिक बधाई आदरणीय मुसाफ़िर जी। लाजवाब ग़ज़ल। 

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