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हर तरफ़ रौशनी के डेरे हैं (ग़ज़ल)

2122  /  1212  /  22

हर तरफ़ रौशनी के डेरे हैं

मेरी क़िस्मत में क्यूँ अँधेरे हैं [1]

एक अर्सा हुआ उन्हें खोये

अब भी कहता है दिल वो मेरे हैं [2]

और कुछ देर हौसला रखिये

शब के आगे ही तो सवेरे हैं [3]

है धनक एक एक ज़र्रे में

रंग ये किसने यूँ बिखेरे हैं [4]

फ़ैसला सीरतों का यूँ ही सही

ऐब मेरे हैं वस्फ़ तेरे हैं [5]

किस तरह शुक्रिया करूँ उनका

जिन दुआओं ने दिन ये फेरे हैं [6]

इस शरीफ़ों के शह्र में 'शाहिद'

कू-ब-कू चोर और लुटेरे हैं [7]

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by रवि भसीन 'शाहिद' on October 22, 2022 at 5:27pm

बहुत शुक्रिय: आदरणीय सारथी बैद्यनाथ जी।

Comment by Saarthi Baidyanath on October 22, 2022 at 11:53am

Well try.. keep it up.

Comment by रवि भसीन 'शाहिद' on October 17, 2022 at 6:31pm

आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' साहिब, सुख़न-नवाज़ी के लिए आपका बहुत शुक्रिय:।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 16, 2022 at 4:45pm

बढ़िया ग़ज़ल कही आदरणीय रवि जी...बधाई

Comment by रवि भसीन 'शाहिद' on October 10, 2022 at 2:02pm

आदरणीय महेंद्र कुमार जी, आपकी हौसला-अफ़ज़ाई और बधाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिय:।

Comment by रवि भसीन 'शाहिद' on October 10, 2022 at 1:59pm

आदरणीय उस्ताद-ए-मुहतरम समर कबीर साहिब, आपकी आपकी हौसला-अफ़ज़ाई और इनायत के लिए तह-ए- दिल से आपका शुक्रगुज़ार हूँ।

Comment by रवि भसीन 'शाहिद' on October 10, 2022 at 1:57pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' भाई, हौसला-अफ़ज़ाई के लिए आपका हार्दिक आभार!

Comment by Mahendra Kumar on October 9, 2022 at 8:24am

बहुत बढ़िया ग़ज़ल कही है आपने आदरणीय रवि जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। 

Comment by Samar kabeer on October 9, 2022 at 6:46am

जनाब रवि भसीन 'शाहिद' जी आदाब, उम्द: ग़ज़ल कही आपने, मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाएँ ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on October 8, 2022 at 9:01pm

आ. भाई रवि जी , सादर अभिवादन। सुन्दर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।

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