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आज मै आप लोगो की सेवा में एक बार फिर अपनी रचना प्रस्तुत रहा हूँ. मुझे उम्मीद है की ये आप लोगो को पसंद आएगी. और आप लोगो का आशीर्वाद रूपी कमेन्ट अवश्य मिलेगा.
जागरण गीत

पूरब में जगी है भोर, पंछी करने लगे है शोर,
मुसाफिर तू भी जग जा, हो मुसाफिर तू भी जग जा,

जग जाएगा तो पायेगा जग में सुन्दर अमूल खजाना,
सोकर खोकर समय चूकि फिर रह जाए पीछे पछताना .
समय के रहते जाग, की अपना हिस्सा ले तू आज,
मुसाफिर तू भी जग जा, हो मुसाफिर तू भी जग जा,

अपना सब कुछ दे देने को खड़े ये देखो पेड़ सयाने,
लेने की तो कोशिश कर तू पूरा मिलेगा सोलह आने.
लूट सके तो लूट, मिली है आज ये पूरी छूट,
मुसाफिर तू भी जग जा, हो मुसाफिर तू भी जग जा,

देख लुटाने को सूरज अब खोल रहा है अपना पिटारा,
पाने की तू कोशिश कर ले, पा जाएगा तू भी सितारा.
कोशिश से ले ले आज, वरना रह जाएगा राज़,
मुसाफिर तू भी जग जा, हो मुसाफिर तू भी जग जा,

अनवरत ये चलती नदिया, कह रही है चलता जा,
काम अभी तू कर ले अपना आगे का है भरोषा क्या?
श्रम से मिलता सुख, जो सोये पता है वो दुःख.
मुसाफिर तू भी जग जा, हो मुसाफिर तू भी जग जा,
हाँ हाँ मुसाफिर तू भी जग जा.

आशीष यादव "राजा रुपर्शुखम"

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Comment by Rash Bihari Ravi on August 25, 2011 at 4:11pm

देख लुटाने को सूरज अब खोल रहा है अपना पिटारा,
पाने की तू कोशिश कर ले, पा जाएगा तू भी सितारा.

 

vah kya bat hain

Comment by monika on August 25, 2011 at 2:54pm

वाह बहुत खूब कविता लिखी हे आपने बधाई स्वीकार करे

Comment by Veerendra Jain on August 25, 2011 at 11:39am

जग जाएगा तो पायेगा जग में सुन्दर अमूल खजाना,
सोकर खोकर समय चूकि फिर रह जाए पीछे पछताना .
समय के रहते जाग, की अपना हिस्सा ले तू आज,
मुसाफिर तू भी जग जा, हो मुसाफिर तू भी जग जा..

 

bahut hi badhiya ashish ji...bahut bahut badhai aapko is rachna per..

Comment by Deepak Sharma Kuluvi on August 25, 2011 at 9:43am

bahut hi sundar,manmohak

dhanyabad

Comment by satish mapatpuri on August 25, 2011 at 1:29am

अनवरत ये चलती नदिया, कह रही है चलता जा,
काम अभी तू कर ले अपना आगे का है भरोषा क्या?
श्रम से मिलता सुख, जो सोये पता है वो दुःख.
मुसाफिर तू भी जग जा, हो मुसाफिर तू भी जग जा,
बहुत बढ़िया आशीष जी , शुक्रिया

 

Comment by आशीष यादव on August 13, 2010 at 12:54pm
aap logo ne saraaha meri kawita ko, mai dhanya ho gaya, aage bhi aap log apna pyaar dete rahe

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 13, 2010 at 7:55am
बहुत ही सुंदर जागरण गीत लिखा है आशीष जी आपने, प्रतिभा आप मे है ऐसे ही लिखते रहे , बढ़िया लिख रहे है, बधाई,
Comment by आशीष यादव on August 12, 2010 at 9:35pm
rachana sarahne ke liye mai MANOJ JI aur PRITAM JI ko dhanyawaad deta hu aur gujaris karta hu ki aap log aise hi mujhe saraahate rahe
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on August 12, 2010 at 8:40pm
bahut badhiya ashish jee....hume to pata hi nahi tha ki aapka aisa bhi roop hoga...aap to chupe rustam nikle janab.....

bahut hi badhiya rachna hai ashish bhai.
bahut bahut dhanybaad yahan humlogo ke beech share karne ke liye....

aapka hi apna..
preetam kumar tiwary
ranchi
8051853108

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