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अय तिरंगे शान तेरी कम ना होने देंगे हम

तू हमारा दिल जिगर है तू हमारी जान है
तू भरत है तू ही भारत तू ही हिन्दुस्तान है
अय तिरंगे शान तेरी कम ना होने देंगे हम
तू हमारी आत्मा है तू हमारी जान है |

तेरी खुशबू से महकती देश की माटी हवा
हर लहर गंगा की तेरे गीत गाती है सदा
तू हिमालय के शिखर पर कर रहा अठखेलियां
तेरी छांव में थिरकती प्यार की सौ बोलियां
तू हमारा धर्म है मजहब है तू ईमान है |

जागरण है रंग केसरिया तेरे अध्यात्म का
चक्र सीने पर है तेरे स्फुरित विश्वास का
भारती की आंख का तारा बना है रंग हरा
तू दीवाली तू ही होली और तू ही दशहरा
आस्था है तू जवानों की वतन की आन है |

तू शहीदों की शहादत से लिपटकर जब चला
भारती के लाल की तुरबत से उठ के जब चला
आंख भर आई करोडों सर झुके सम्मान में
देखते हैं हम तुझे हर वीर के मन प्राण में
देश का बचपन जवानी तुझ पे सब कुर्बान है |

मेरे काव्य संग्रह --कनक --से
१५ अगस्त 2010 के पावन पर्व पर अमर शहीदों को नमन करते हुए
समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभ कामनाओं सहित ---सादर समर्पित
--जगदीश तपिश --

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 15, 2010 at 7:40pm
तपिशजी सादर पढ़ गया.
धन्यवाद.

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 15, 2010 at 12:20pm
आदरणीय जगदीश तपिश साहब जी, सर्वप्रथम तो मैं भी आपको स्वतंत्रता दिवस की बधाई देना चाहता हूँ तत्पश्चात स्वतंत्रता दिवस पर लिखी इस खुबसूरत और बेहतरीन रचना पर भी बधाई स्वीकार करे,बहुत ही उम्द्दा और सुंदर शब्दों से सुसज्जित शानदार रचना, बहुत बहुत धन्यवाद इस रचना पर,
Comment by sanjiv verma 'salil' on August 15, 2010 at 12:04pm
अच्छी रचना. शुभ कामनाएं.
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on August 15, 2010 at 11:07am
आज आज़ादी के 63 वें सालगिरह पर आपकी इतनी अच्छी रचना आई इससे ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार धन्य है,,...बहुत बहुत धन्य्बाद इतनी अच्छी रचना पोस्ट करने के लिए...

jai hind jai bharat

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