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भूख की चौखट पे आकर कुछ निवाले रह गए

फिर से अंधियारे की ज़द में कुछ उजाले रह गए

 

आपकी ताक़त का अंदाजा इसी से लग गया

इस दफे भी आप ही कुर्सी संभाले रह गए

 

लाख कोशिश की मगर फिर भी छुपा ना पाए तुम

चंद घेरे आँख के नीचे जो काले रह गए

 

जब से मंजिल पाई है होता नहीं है दर्द भी

देते हैं आनंद जो पाओं में छाले रह गए                                    

 

जम गए आंसू, चुका आक्रोश, सिसकी दब गई

इस पुराने घर में बस चुप्पी के जाले रह गये

 

अब डुबा दे या कि पहुंचा दे मुझे उस पार तू

हम तो सब कुछ भूलकर तेरे हवाले रह गए

 

उनसे बढ़कर इस जहाँ में है नहीं कोई धनी

अपने पुरखों की विरासत जो संभाले रह गए

 

 

Views: 761

Comment

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Comment by Mukesh Verma "Chiragh" on April 23, 2014 at 5:49pm

आदरणीय राणा जी
ग़ज़ब का लिखा है आपने..जितनी भी तारीफ़ की जाए कम है..
ये दो शेर तो बस..लाजवाब

भूख की चौखट पे आकर कुछ निवाले रह गए

फिर से अंधियारे की ज़द में कुछ उजाले रह गए

जब से मंजिल पाई है होता नहीं है दर्द भी

देते हैं आनंद जो पाओं में छाले रह गए                                   


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on February 16, 2012 at 10:21pm

आदरणीया

 rajesh kumari जी

 asha pandey ojha दीदी

और आदरणीय 

 arun kumar nigam जी और  N .B. Nazeel साहब दाद के लिए शुक्रिया|

सौरभ सर आपने गज़ल यहाँ पर देखी भी है और दिल खोलकर दाद भी दी थी

:-):-):-):-):-):-):-)


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 16, 2012 at 10:15pm

कई-कई बार सुना है आपसे इस ग़ज़ल को. और भरपूर, दिल खोल कर हमने दाद दी है हर एक शे’र पर.  परन्तु,  आज इस ग़ज़ल को यहाँ देखा तो आश्चर्य हुआ कि मैं अबतक इस ग़ज़ल को यहाँ कैसे नहीं देख पाया था !. ..

 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 16, 2012 at 6:17pm

जम गए आंसू, चुका आक्रोश, सिसकी दब गई

इस पुराने घर में बस चुप्पी के जाले रह गये......वाह एक से बढ़कर एक शेर 

 

Comment by Nazeel on February 16, 2012 at 5:42pm

nice ...:-)

Comment by asha pandey ojha on February 16, 2012 at 5:16pm

उनसे बढ़कर इस जहाँ में है नहीं कोई धनी

अपने पुरखों की विरासत जो संभाले रह गए I am speechless  really 

  great


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on December 2, 2011 at 11:35pm

राणा जी , आपके सात शेरों में हमने इंद्र धनुष के सात रंग देखे,  क्रमवार रंग देखिए ;-

1) हालत  2) सियासत  3) हकीकत  4) मोहब्बत  5) रवायत  6) इनायत  और 7) विरासत


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on December 2, 2011 at 9:07am

आदरणीय,

Shyam Bihari Shyamal जी

वीनस केशरी जी

Saurabh Pandey जी

 Raj Batalviजी

 विवेक मिश्र जी

 Lata R.Ojha जी

  dilbag virk जी

और

mrs.kavita verma जी

आप सभी ने अपना अमूल्य समय निकाल कर उत्साहवर्धन किया इसलिए बहुत बहुत आभार|

Comment by Kavita Verma on December 1, 2011 at 6:56pm

bahut khoobsurat ..ek ek sher umda...

Comment by dilbag virk on December 1, 2011 at 3:39pm
आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें
चर्चा मंच-715:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

कृपया ध्यान दे...

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