For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

::::: हिंदी दिवस (क्या इस दिवस का नाम लेने भर की भी हैसियत है हमारी ?) :::: ©

::::: हिंदी दिवस :::::
::::: (क्या इस दिवस का नाम लेने भर की भी हैसियत है हमारी ?) :::: ©

हिंदी हिंदी हिंदी !!!
► . . . आज सभी इस शब्द केपीछे पड़े हैं, जैसे शब्द न हुआ तरक्की पाने अथवा नाम कमाने का वायस हो गया l खुद के बच्चे अंग्रेजी स्कूल में चाहेंगे और शोर ऐसा कि बिना हिंदी के जान निकल जाने वाली है l अरे मेरे बंधु यह दोगलापन किसलिए ? स्वयं को धोखा किस प्रकार दे लेते हैं हम ? किसी से बात करते समय खुद को अगर ऊँचे दर्जे पर स्थापित दर्शाना हो तो इसी हिंदी का दामन जाने कब छूट जाता है, पता ही नहीं चलता l उस वक्त टूटी-फूटी या साबुत जैसी भी सही परन्तु हिंदी के कथित ये गीतकार महानुभाव बोलेंगे बस अंग्रेजी में ही l कहाँ गुल हो जाता है तब उनका हिंदी प्रेम ? अनायास ही ऐसा क्या हो जाता है कि जो आज प्रेयसी है वह तत्क्षण ही अपना दर्ज़ा खो बैठती है ?

► . . . हम यह भरोसा कब दिला पाएंगे स्वयं को कि भाषा जो चीनी भाषा के बाद दूसरे नंबर पर विश्व में सर्वाधिक रूप से बोली जाती है वह अपने ही उद्गम स्थल पर दोयम दर्जेदार नहीं वरन अपने आप में एक सशक्त अभिव्यक्तिदार भाषा है l

► . . . ज़रूरत यह नहीं कि वर्ष में एक बार कुछ हो-हल्ला मचा कर या नारेबाजी द्वारा हिंदी की आरती बाँच ली जाये और इसे ही इति समझ लिया जाये, वरन आवश्यकता है कुछ यथार्थवादी कदम उठाये जाने की जिन्हें कोई उठाना नहीं चाहता l कौन करे कुछ जब परायी भाषा से रोटी मिल जाती है ? हमें पड़ी ही क्या है, कहकर पल्ला झाड लिया जाता है l कहाँ कुछ फर्क पड़ जाने वाला है ?

► . . . यही सोच लिए, जिए और मरे जाओ l हिंदी उत्थान के नाम पर सारे देश में जाने कितने सरकारी गैर-सरकारी संसथान स्थापित हैं जो अपने कर्मचारियों के घर की रोज़ी-रोटी का जरिया बने हुए हैं l परन्तु क्या कभी किसी ने यह देखने की कोशिश की है कि इस सारे खटराग के बाद भी हिंदी का वास्तविक विकास कितना और किस स्तर तक हो पाया है ? आवश्यकता है स्वयं का आत्मविश्लेषण किये जाने की, यह देखे जाने की, कि असल में हम हैं कहाँ ?

► . . . जिस विस्तृत पैमाने पर हिंदी बोली जाती है, इस सम्भावना को देख-समझ विदेशियों ने अपने यहाँ कोर्स खोल रखे हैं l अभी हाल के कुछ महीनों में अमेरिका ने अपने कॉलेजों में हिंदी विभाग भी शामिल किया था, ताकि वे लोग इस भाषा से लाभ उठा सकें l एक बस हम ही हैं जो वैश्विक स्तर पर अपनी महत्ता को नहीं समझ पा रहे हैं l यदि हम चाहें तो इतनी मजबूत स्थिति में तो हम हैं ही कि किसी भी अन्य देश को अपनी भाषा के बल पर नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दें, परन्तु आज भी शायद मानसिक स्तर पर हम अंग्रेजों के गुलाम ही हैं, जो उनके जाने के बाद भी उनकी सभ्यता-संस्कृति और भाषा तक को एक अच्छे और सच्चे आज्ञाकारी एवं ईमानदार ज़र-खरीद गुलाम की हैसियत से ढोये जा रहे हैं l मैं तो कहता हूँ मिलकर सब बोलो मेरे साथ "लौंग लिव द किंग - लौंग लिव द किंगडम" l

► . . . कुछ होगा ज़रूर मगर शोर मचने भर से नहीं बल्कि अपनी मानसिकता बदलने से होगा l

► . . . जय हिंद ll और अगर जाग गए तो जय हिंदी तो हम कर ही लेंगे ll

► ► ► ► ► जोगेन्द्र सिंह Jogendra Singh ( 14 सितम्बर 2010 )
.

Views: 599

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by sanjiv verma 'salil' on September 25, 2010 at 10:32pm
विचारणीय मुद्दे उठाए गये हैं. भारतीय हिन्दी तब बोलेंगे जब विदेशों से सीख कर आएँगे.
Comment by Aparna Bhatnagar on September 18, 2010 at 11:03pm
जोगी जी , केदारनाथ जी की एक कविता यहाँ रखना चाहते हैं ... इस कविता ने हमेशा दिल को कुरेदा और हिंदी को अपने ही देश में परित्यक्त होने के दुःख को जैसे भीतर तक छलनी किया -
जैसे चींटियाँ लौटती हैं
बिलों में
कठफोड़वा लौटता है
काठ के पास
वायुयान लौटते हैं एक के बाद एक
लाल आसमान में डैने पसारे हुए
हवाई-अड्डे की ओर

ओ मेरी भाषा
मैं लौटता हूँ तुम में
जब चुप रहते-रहते
अकड़ जाती है मेरी जीभ
दुखने लगती है
मेरी आत्मा ...
आपका लेख इस दुखती आत्मा पर हाथ रखने जैसा है . बधाई !
Comment by Pankaj Trivedi on September 15, 2010 at 7:01pm
Jogi, tum bade pyare ho mere bhai ! us vakt use kahana uchit nahi tha... thanks..
Comment by Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह on September 15, 2010 at 6:24pm
रत्नेश जी , आप पहली बार आये हैं सो आपका शुक्रिया दोस्त ...
Comment by Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह on September 15, 2010 at 6:23pm
बागी जी , आपको मेरा लेख पसंद आया इसके लिए आपका धन्यवाद ...
Comment by Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह on September 15, 2010 at 6:22pm
पंकज जी ,
आपका इशारा मैं समझ गया, मगर आपके उदाहरण और मेरे लेख में कही बात जोकि अपने ढूंढ कर निकली है, में बड़ा ही फर्क है भाई जी ... खुद आपने ही कहा है कि उस महिला को अपनी बात कहनी नहीं आयी और कोई भी समझदार जान सकता है कि गलत ढंग से कही बात के मतलब बुरे भी निकल सकते हैं सो जो भी कहा जाये सोच समझ कर ही कहा जाना चाहिए ना कि बोलना है केवल इसीलिए मुँह खोला जाये ..
Comment by Pankaj Trivedi on September 15, 2010 at 9:33am
वाह जोगेंद्र,
हमेशा अलग सोच, ठोस कार्य के साथ आगे बढ़ने का तेरा ये तेज़तर्रार रूप ! बहुत ही सटीक | किसी महिला ने अपने ब्लॉग पर एकबार लिखा था - "हम उत्सवो के आधार पर मेंढक की तरह बातें करते हैं |" तब उनके ऊपर लोग बरस पड़े थे | हालांकि, उन्हें बात कहानी नहीं आई | आज उसी सन्दर्भ से तुमने कह diyaa कि "हमारी हैसियत है क्या?"
मैं बिलकुल सहमत हूँ तुम्हारे साथ | तुमने जो विचार-मुद्दे दिए है, वाकई काबिल-ऐ-तारीफ़ है !

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 14, 2010 at 11:09pm
कुछ होगा ज़रूर मगर शोर मचने भर से नहीं बल्कि अपनी मानसिकता बदलने से होगा ,
बहुत खूब जोगी जी , बहुत ही ओज पूर्ण यह लेख है, सुंदर विचार, हमे हिंदी को राज भाषा से राष्ट्र भाषा बनाने पर विचार करना चाहिये |
Comment by Ratnesh Raman Pathak on September 14, 2010 at 6:37pm
जी बड़ी ही अनमोल मुद्दा है यह ,यह बात सबको पता है लेकिन किसी ने कहने की हिम्मत न्ही की .हमारा देश तो बस कहने के लिए हिंद राष्ट्रा है और मातृभाषा हिन्दी.
jai hind

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
yesterday
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service