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भुजंग तुम 

वतन  के  लिए 

व्याल हम 

वतन  के  लिए 

कलंक तुम

वतन  के  लिए

तिलक हम 

वतन  के  लिए 

दुश्मन हो  

वतन  के  लिए 

ढाल हम 

वतन  के  लिए 

हार तुम 

वतन  के  लिए

जीत हम 

वतन  के  लिए 

जीना  है  

वतन  के  लिए  

 मरना  है  

वतन  के  लिए  

शांति  है 

वतन  के  लिए   

 क्रांति  है  

वतन  के  लिए   

हम एक  हैं  

वतन  के  लिए   

राजगुरु  भगत  सुखदेव  है

वतन  के  लिए

आजाद  थे  आजाद  है  आजाद  रहेंगे  

वतन  के  लिए   

 

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Comment

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Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 14, 2012 at 4:46pm

adarniya mishr ji, sadar abhivadan. sarahna hetu hardik abhar.

Comment by arunendra mishra on April 14, 2012 at 12:41am

अन्तंत ही विद्रोही विचार ......अभिवादन स्वीकार करे ...

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 5, 2012 at 3:26pm

आदरणीय संजय जी, सादर अभिवादन.

आपने सराहा, प्रेरित हुआ. धन्यवाद,
Comment by Sanjay Mishra 'Habib' on April 5, 2012 at 3:02pm

गहरे अन्तर्निहित भाव लिए देश को समर्पित खुबसूरत रचना....

सादर बधाई प्रदीप भाई जी.

वन्दे मातरम.

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 28, 2012 at 7:28pm
aadarniya samast obo parivar "vatan ke liye" padhne, sarahne evam featured hone ka abhar pragat karta hun. is vidyalay ka abhari hoon.
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 24, 2012 at 5:45pm

आदरणीय  अरुण  जी,  सादर अभिवादन ,  आप को पसंद आयी , समर्थन,  शामिल होने के लिए  धन्यवाद ,वन्दे मातरम्. 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 24, 2012 at 5:42pm

आदरणीया राजेश कुमारी  जी,  सादर अभिवादन ,  आप को पसंद आयी , धन्यवाद ,वन्दे मातरम्. 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 24, 2012 at 5:37pm

आदरणीय अविनाश जी,  सादर अभिवादन ,  आपने रस लिया. वन्दे मातरम्. धन्यवाद 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 24, 2012 at 5:35pm

स्नेही महिमा जी,  सादर  आमीन. धन्यवाद.

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 24, 2012 at 1:16pm

आदरणीयहरीश जी , सादर अभिवादन. आपका स्नेह ही है. धन्यवाद

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