For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आंदोलित विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगे सरकार से मनवाने हेतु व्यस्ततम  चौराहे को मानव श्रृंखला बना कर घेर दिये थे, मेरे नेर्तित्व में भी एक संगठन नारेबाजी और रास्ता अवरुद्ध करने मे संलग्न था, भीड़ में कुछ मरीजों के परिजन  अपनी गाड़ियों को आगे जाने देने के लिए गिड़गिड़ा रहे थे, राधे बाबू जोर जोर से सभी को निर्देशित कर रहे थे कि एक व्यक्ति को भी आगे नहीं जाने देना है, चाहे कुछ हों जाए | एकाएक राधे बाबू का स्वर बदला और कहने लगे कि जाने दो भाई मरीजों की गाड़ियों को जाने दो | मैं आश्चर्य से पूछ बैठा "अरे राधे बाबू ये क्या हो गया आपको,अभी तो आप कह रहे थे कि किसी को आगे नहीं जाने देना है चाहे जो हो जाए और अभी जाने देने को कह रहे है" 

राधे बाबू धीरे से बोले "उस भीड़ में मेरा भाई भी है जो पिता जी को डाक्टर के पास ले जा रहा है"

Views: 723

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 5, 2012 at 12:41pm

प्रिय  कुमार  जी , सस्नेह.

सराहना ,भावना हेतु आभार 
अच्छी अच्छी रचना करो तैयार 
मुख्या प्रष्ट पर जाएँ 
मनवांछित ग्रुप का बटन दबाएँ
खुल जाये जब वो पन्ना 
ऊपर  एइड करना न भूलना 
आये फिर  भी कोई दिक्कत 
पूंछने में  संकोच न करना. 
 
Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on May 5, 2012 at 8:22am

सादर प्रणाम कुशवाहा सर

बिलकुल सही कटाक्ष किया आपने इन तथाकथित प्रतिनिधियों पर, बहुत-बहुत बधाई.
सर मैं भी बाल साहित्य ग्रुप ज्वाइन करना चाहता हूँ, क्या करूँ?
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 3, 2012 at 12:21pm

आदरणीय अशोक जी, सादर अभिवादन 

आपका स्नेह और  मार्ग दर्शन बना रहे. धन्यवाद.
Comment by Ashok Kumar Raktale on May 2, 2012 at 10:54pm

आदरणीय प्रदीप जी
              सादर, हकीकत के बहुत करीब और शिक्षाप्रद भी है ये लघुकथा. बधाई.

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 2, 2012 at 3:47pm

आदरणीय सौरभ जी    (गुरुदेव जी)  , सादर अभिवादन. 

पुरवहु मोर मनोरथ स्वामी.  धन्यवाद. 
 

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 2, 2012 at 3:20pm

जाके पाँव न फटे बिवाई, सो क्या जाने पीर पराई.. .  राधे बाबू या इन जैसे लोग इतने मायोपिक होते हैं कि उन्हें बस कुछ दूर तक की नहीं सूझता, केवल आसन्न लाभ और घिनौनी स्वार्थसाधना के.  बहुत ही सही तस्वीर निकाली है आपने, आदरणीय प्रदीपजी. 

बचपन में अण्टन चेखोव  की एक नाटिका ’गिरगिट’ जो कि इसी तरह की दोगली नीतियों पर एक सशक्त नाटिका है, के गली-मंचन (Street skit) के क्रम में हम गोहराया करते थे,  झटपट रंग बदल लो भाई, झटपट ढंग बदल लो.. 

आपकी इस लघुकथा ने अनायास उन दिनों की याद ताज़ा करा दी. सादर धन्यवाद.

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 2, 2012 at 2:38pm

स्नेही महिमा जी, सादर.

दुनिया का यही दस्तूर है. बिरले मिलेंगे जो इनसे अलग हों. 
धन्यवाद. 
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 2, 2012 at 2:36pm

प्रिय मृदु जी, सस्नेह. 

आपकी हार्दिक बधाई दिल से स्वीकार की. आप bhi अपना नाम roshan करें. शुभ kamna. 
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 2, 2012 at 2:34pm

आदरणीय बागी  जी  , सादर 

आपके द्वारा की गयी प्रशंशा सर माथे पर. 
क्रष्ण और सुदामा की कथा याद आ गयी. 
आप अंतर्यामी  हैं प्रभु. बहुत बहुत आभार आपका. 
Comment by MAHIMA SHREE on May 1, 2012 at 10:30pm

आदरणीय प्रदीप सर , सादर प्रणाम ,

आपकी कथा गिरगिट के लिए बहुत -२ बधाई ...सच इंसान अपने लिए तुरंत नियम तोड़ देता है और बदल जाता है ..

बहुत अच्छी प्रस्तुति

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"अजय गुप्ता जी, आपका सुझाव भी अच्छा लगा, इस पर विचार करती हूॅं आपने दूसरे मिसरे पर भी ध्यान दिया।…"
3 minutes ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-184
"आदाब। सत्य और सत्य के चारों ओर के वातावरण, परिदृश्य और हालात शाब्दिक करती रचना हेतु हार्दिक बधाई…"
6 minutes ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"बहुत शुक्रिया जी "
7 minutes ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदाब। गिरह वाला शे'अर अच्छा लगा जनाब दयाराम मेठानी जी। "
10 minutes ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"वाह। अंतिम शे'अर में बढ़िया प्रयोग आदरणीय अजय जी।"
13 minutes ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदाब। गिरह वाले बढ़िया शे'अर के साथ अच्छी कोशिश। कहते हैं ग़ज़ल को पढ़कर या गाकर देखने से दोष…"
16 minutes ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभाजी ,  अति सुंदर , हार्दिक बधाई। आम की ज्यादा तारीफ उचित है। आखिर फलों का राजा…"
16 minutes ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदाब। हमें भी मार्गदर्शन प्रदान करने हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीय तिलकराज कपूर जी।"
19 minutes ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदाब। बढ़िया गिरह के साथ अच्छी ग़ज़ल मुहतरमा मंजीत कौर जी।"
21 minutes ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय शेख शहजादजी  हार्दिक धन्यवाद आभार आपका।  छंदोत्सव में आपकी उपस्थिति के लिए पुनः…"
23 minutes ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभाजी , हार्दिक धन्यवाद आभार आपका।  संशोधित चौपाई पोस्ट कर दिया हूँ।"
26 minutes ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"आदाब। प्रदत्त चित्र आधारित  परिदृश्य और मौसम आधारित आगाही और सकारात्मक संदेश सम्प्रेषित करती…"
31 minutes ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service