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जुदा सारे जहां से गाँव अब भी गाँव है

हमारी फिक्र थी ये गाँव अब भी गाँव है
सियासत के करम से गाँव अब भी गाँव है

मखमली सेज सूखी घास से देखो बनी
महल सी झोपड़ी में गाँव अब भी गाँव है

मिलेगी छाँव बरगद नीम पीपल की घनी
मिटे हर पीर जाके गाँव अब भी गाँव है

ख़ुशी हर चेहरे में औ दर्द दिल में दफ़न
रंज औ गम भुलाके गाँव अब भी गाँव है

सखी ऐसे तके है राह हाये प्रियतम की
बिछाये चश्म अपने गाँव अब भी गाँव है

परेशाँ आदमी बिजली लगे जादूगरी
बिना बिजली अधूरे गाँव अब भी गाँव है

रिवाजो रश्म की इबरत मिले हर-सू ऐसी
दिलों से दिल लगाले गाँव अब भी गाँव है

मवेशी हैं यहाँ पर दूध की नदिया बहे
पले हैं शहर जिससे गाँव अब भी गाँव है

पुजा हर एक सजर रब सा पुजा पत्थर यहाँ
इबादत सीख इससे गाँव अब भी गाँव है

फरेबी ढूँढने से "दीप" एक पाया नहीं
जुदा सारे जहां से गाँव अब भी गाँव है


संदीप कुमार पटेल "दीप"

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Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 15, 2012 at 10:05am

सादर वन्दे Ganesh Jee "Bagi" सर जी 
आपकी प्रतिक्रिया का जो आशीर्वाद मिला है उससे मेरा लिखना सार्थक हो गया सर जी
अपना ये स्नेह और आशीर्वाद ऐसे ही बनाये रखिये आपका सादर आभार

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 15, 2012 at 10:03am

आपका बहुत बहुत धन्यवाद PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA सर जी आपका सादर आभारी हूँ

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 15, 2012 at 10:02am

आपकी प्रतिक्रिया से उत्साह दोगुना हो जाता है rajesh कुमारी जी आपका सादर आभार और ह्रदय से शुक्रिया

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 15, 2012 at 10:01am

बहुत बहुत शुक्रिया आपका Nilansh  जी ...सादर आभार

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 15, 2012 at 10:00am

बहुत बहुत शुक्रिया आपका अजय जी .........आपने अपना कीमती वक़्त दिया उसके लिए आभार


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 15, 2012 at 9:43am

//सखी ऐसे तके है राह हाये प्रियतम की
बिछाये चश्म अपने गाँव अब भी गाँव है//

वाह वाह संदीप जी, क्या रदीफ़ लिया है, आनंद आ गया , सभी शेर बहुत ही अच्छे लगें , दाद कुबूल करें भाई |

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 13, 2012 at 3:38pm

vaah sandip ji , sab kuch hai vahan par hain ganv. badhai,


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 13, 2012 at 12:06pm

पुजा हर एक सजर रब सा पुजा पत्थर यहाँ
इबादत सीख इससे गाँव अब भी गाँव है....बहुत सुन्दर भाव पूर्ण रचना गाँव फिर भी गाँव हैं सही कहा है 

Comment by Nilansh on May 12, 2012 at 8:48pm

मिलेगी छाँव बरगद नीम पीपल की घनी
मिटे हर पीर जाके गाँव अब भी गाँव है


bahut sunder sandip bhai

Comment by AjAy Kumar Bohat on May 12, 2012 at 8:27pm

aapne to gaanv ki yaad dila di.

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