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=========== माँ ===========

मेरे आते ही तेरा मुश्कुराना याद है
वो रोते रोते तुझसे लिपट जाना याद है

तेरे हाथों में माँ जादू रहा मीठा कोई
वो अपने हाथों से मुझको खिलाना याद है

तेरा दर छोड़ा मैंने जब पढ़ाई के लिये
मैं खुद भी रोया माँ तुझको रुलाना याद है

मेरे गम अपने आँचल में छुपा तुमने रखे
मेरी खुशियों में तेरा खिलखिलाना याद है

मेरे यारों ने मुझको नाम तो नए नए दिए
माँ तेरा वीरा कह मुझको बुलाना याद है

मैं तो रूठा हूँ माँ हर बार गलती में मेरी
वो गोदी में बैठा फिर भी मनाना याद है

मैं रब से ये मांगू सबको मिले माँ इधर पे
उसकी जन्नत में वो गुजरा जमाना याद है

उसकी ममता की छाया दीप किस्मत से मिले
मैं तो सोया हूँ पर उसको जगाना याद है

====संदीप कुमार पटेल "दीप"=====

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Comment by Ashok Kumar Raktale on May 18, 2012 at 6:58pm

संदीप जी
       नमस्कार, बहुत सुन्दर कविता, माँ की ममता को भी कभी कोई भूल पाया है भला. बधाई.

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 14, 2012 at 8:08pm

आपका बहुत बहुत शुक्रिया और सादर आभार महिमा जी ..................सादर नमन

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 14, 2012 at 8:07pm

आपका बहुत बहुत आभारी हुँ अजय जी ...................तहे दिल से शुक्रिया आपका

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 14, 2012 at 8:06pm

आपका तहे दिल से शुक्रिया नीलांश जी , आपका आभारी हुँ ॥

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 14, 2012 at 8:05pm

आदरणीय प्रदीप सर जी सादर नमन

आपका आशिर्वाद ऐसे ही बनाये रखिये ...................बहुत बहुत आभारी हुँ

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 14, 2012 at 8:04pm

आदरणीय गणेश सर जी आपकी इस प्रतिक्रिया को पाके मै कृतकृत्य हो गया ..................मै अथक प्रयास करुंगा के इसकी बहर मे सुधार कर लूँ ॥ आपका बहुत बहुत शुक्रिया सर जी

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 14, 2012 at 7:54pm

आदरणीया rajesh kumari जी आपका ह्रदय से धन्यवाद और सादर आभार ......................आपके कहे अनुसार मै इसमे सुधार कर लूंगा .................आपका आभारी हुँ ।

Comment by MAHIMA SHREE on May 14, 2012 at 3:55pm
मैं रब से ये मांगू सबको मिले माँ इधर पे
उसकी जन्नत में वो गुजरा जमाना याद है
वाह संदीप जी .. बहुत ही सुंदर भावों से सजी है आपकी गजल ... आनंद आ गया . बधाई आप
Comment by AjAy Kumar Bohat on May 13, 2012 at 7:08pm

वाह बहुत ही सुन्दर ग़ज़ल कही है बन्धु...

Comment by Nilansh on May 13, 2012 at 3:15pm

bahut sunder  bhai

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