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(1)

कई दिनों से 

सफ़ेद चादर के फंदे ने 

गला घोंट रखा था 

आज धूप से गले  मिलकर 

खुल के रोये चिनार

(2)

हाथी दांत की चूड़ियाँ

बाजार में देखी तो ख़याल आया 

कि कहीं कल इंसान 

की अस्थियों के लाकेट

तो नहीं आ जायेंगे बाजार में

(3) 

तेरी इस ग़ज़ल के कुछ शब्दों से 

लहू रिस रहा है 

लगता है कहीं से बहुत बड़ी 

चोट खाकर आये हैं 

तभी तो दर्द से बरखे 

यूँ फडफडा रहे हैं 

(4)

आज मेरी छाँव में बैठ लो दोस्तों 

कल तो टुकड़े- टुकड़े  होकर 

किसी शहर चला जाऊँगा 

ढूँढना हो तो ढूँढ लेना

किसी के स्वागत कक्ष में 

तुमको गोदी में बड़े प्यार से बिठाऊंगा 

*****

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 14, 2012 at 6:07pm

बहुत बहुत हार्दिक आभार वंदना जी 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 14, 2012 at 5:15pm

प्रदीप कुमार कुशवाह  जी आपकी टिपण्णी सर आँखों पर मेरी कलम को बल मिला 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 14, 2012 at 5:13pm

महिमा जी बहुत बहुत हार्दिक आभार 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 14, 2012 at 5:12pm

सुरेन्द्र कुमार शुक्ला जी हर्दय से आभारी हूँ मेरे ख्यालों के मर्म ने आपके दिल को छुआ 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 14, 2012 at 4:33pm

हाथी दांत की चूड़ियाँ

बाजार में देखी तो ख़याल आया 

कि कहीं कल इंसान 

की अस्थियों के लाकेट

तो नहीं आ जायेंगे बाजार में

आदरणीय राजेश कुमारी जी, सादर 
आल दा वे फार ४ रन , बधाई. 
Comment by MAHIMA SHREE on May 14, 2012 at 4:15pm
आज मेरी छाँव में बैठ लो दोस्तों

कल तो टुकड़े- टुकड़े होकर

किसी शहर चला जाऊँगा

ढूँढना हो तो ढूँढ लेना

किसी के स्वागत कक्ष में

तुमको गोदी में बड़े प्यार से बिठाऊंगा ..आदरणीया राजेश दी .. बहुत ही अच्छी लगी आपकी क्षणिकाए.. हार्दिक बधाई आपको
Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on May 14, 2012 at 3:24pm

कि कहीं कल इंसान 

की अस्थियों के लाकेट

तो नहीं आ जायेंगे बाजार में



आदरणीया राजेश कुमारी जी बहुत सुन्दर क्षणिकाएं ..सटीक दृश्य दिखाती हुयी..कहीं वर्फीले चिनार के तो कहीं ..हाथी और वृक्षों के दर्द के रूप में .  श्रीनगर के वे रास्ते याद आ गए  हमें भी ....बधाई ..भ्रमर ५ 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 14, 2012 at 12:55pm

बहुत बहुत हार्दिक आभार प्राची जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on May 14, 2012 at 12:08pm

बहुत सुन्दर मर्मस्पर्शी क्षणिकाएं आदरणीया राजेश कुमारी जी.. हार्दिक बधाई


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 14, 2012 at 11:14am

हार्दिक आभार भावेश राजपाल जी  सराहना के लिए    

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