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तुझे तो देख के जोरों से मेरा दिल धडकता है

तुझे तो देख के जोरों से मेरा दिल धडकता है

जिये पानी बिना मछली के जैसे मन तडपता है

जिगर को थाम के बैठूं मैं अक्सर सामने तेरे

के हाले दिल सुनाने को ये पागल दिल मचलता है

मैं चातक सा फिरूँ राहों में स्वाती बूँद का प्यासा

अगर तुम ना दिखो तो हो के व्याकुल दिल तरसता है

बड़ा बेचैन होता हूँ तू मेरे साथ में जब हो

किसी के साथ देखूं तो कोई शोला भड़कता है

दिवाने घूमते हैं बस तेरा दीदार पाने को

हवाएँ भी हैं थम जाती दुपट्टा जब सरकता है

मेरे सागर से दिल में उठ रहीं हैं इश्क की मौजें

तुझे पाने की खातिर आँखों से सागर छलकता है

तेरे आने से रंगत बढ़ गयी बीमार चेह्रे की

किसी बंजर में जिस तरह कोई बादल बरसता है

संदीप कुमार पटेल "दीप"

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Comment

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Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 17, 2012 at 6:30pm

आदरणीय पटेल जी, सादर 

दिवाने घूमते हैं बस तेरा दीदार पाने को

हवाएँ भी हैं थम जाती दुपट्टा जब सरकता है

बिखरती  है जुल्फें जब शाने पे तेरे 

घटायें मचलती हैं बरस जाने को 

बधाई.  

Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on May 17, 2012 at 6:05pm

संदीप भाई बहुत अच्छी कोशिश और भाव लिए हुए ग़ज़ल प्रस्तुत की है आपने। रदीफ़, काफिया और हजज बहर का अच्छा इस्तेमाल किया है। लेकिन कहीं कहीं ऊला और सानी मिसरो में रफ्त नहीं है। अगर थोड़ा और मेहनत कि जाये तो ये ग़ज़ल और अच्छी हो जाएगी । जैसे कि ये शेर : बड़ा बेचैन होता हूँ तू मेरे साथ में जब हो, किसी के साथ देखूं तो कोई शोला भड़कता है।

ये मिसरा भी थोड़ा खटक रहा है :  जिये पानी बिना मछली के जैसे मन तडपता है

बधाई हो !


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 17, 2012 at 5:45pm

अच्छी कोशिश को बधाई.

Comment by आशीष यादव on May 17, 2012 at 12:44pm

सुन्दर गजल कही आपने सर जी। बधाई स्वीकारिये।
आशिक के हाल-दिल को बखूबी लिखा आपने।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 17, 2012 at 12:23pm

तेरे आने से रंगत बढ़ गयी बीमार चेह्रे की

किसी बंजर में जिस तरह कोई बादल बरसता है....vaah ....vaah bahut bhaavpoorn ghazal likhi hai.

Comment by Bhawesh Rajpal on May 17, 2012 at 11:30am

मेरे सागर से दिल में उठ रहीं हैं इश्क की मौजें

तुझे पाने की खातिर आँखों से सागर छलकता है

तेरे आने से रंगत बढ़ गयी बीमार चेह्रे की

किसी बंजर में जिस तरह कोई बादल बरसता है

बहुत बढ़िया  !   

 

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 17, 2012 at 11:06am
तुझे तो देख के जोरों से मेरा दिल धडकता है
जिये पानी बिना मछली के जैसे मन तडपता है

जिगर को थाम के बैठूं मैं अक्सर सामने तेरे
के हाले दिल सुनाने को ये पागल दिल मचलता है

मैं चातक सा फिरूँ राहों में स्वाती बूँद का प्यासा
अगर तुम ना दिखो तो हो के व्याकुल दिल तरसता है

बड़ा बेचैन होता हूँ तू मेरे साथ में जब हो
किसी के साथ देखूं तो कोई शोला भड़कता है

दिवाने घूमते हैं बस तेरा दीदार पाने को
हवाएँ भी हैं थम जाती दुपट्टा जब सरकता है

मेरे सागर से दिल में उठ रहीं हैं इश्क की मौजें
तुझे पाने की खातिर आँखों से सागर छलकता है

तेरे आने से रंगत बढ़ गयी बीमार चेह्रे की
किसी बंजर में जिस तरह| कोई बादल बरसता है

संदीप कुमार पटेल "दीप"

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