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प्रति चरण ३२ अक्षर, १६-१६ पर दो विश्राम, इक्त्तीस्वां (३१ वाँ) दीर्घ, बत्तीसवां (३२ वाँ ) लघु

शारदा कृपा कर दो मुझको नादान जान
भरो खाली झोली माता ज्ञान का दो वरदान

मैं तेरा ध्यान कर के छंद की रचना करूँ
देश देश गायें सब भारत की बढे शान

छंद मेरे पढ़ें जो भी रस में वो भीग जाएँ
झूम झूम गायें ऐसे बना रहे मेरा मान

सुमिरन तो तेरा ही होता है निसदिन माँ
दीप खड़ा हाथ जोड़ उसको अब दो ज्ञान


========="दीप"==========

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 11, 2012 at 12:54pm

अप्रतिम ,अनुपम रूप घनाक्षरी 

Comment by satyam upadhyay on July 9, 2012 at 10:07am

plz tell me ki kya ye jaruri hai ki isme ant me laghu or deergh varn ki koi badhyta hai?


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on June 5, 2012 at 9:02am

आशीष भाई, घनाक्षरी एक वार्णिक छंद है जिसमे रचना के वर्ण ही गिने जाते हैं, मात्राएँ नहीं.

Comment by आशीष यादव on June 5, 2012 at 8:28am

कृपया मेरी शंका का समाधान करें कि क्या यह अक्षर प्रधान छन्द है। क्या इसमे मात्राओं की गणना का कोई महत्व नही है। कृपया विज्ञजन शंका का समाधान करें।

Comment by आशीष यादव on June 5, 2012 at 8:25am

सुन्दर रचना पर बधाई स्वीकार करें।

Comment by chandan rai on June 4, 2012 at 8:47pm
शारदा कृपा कर दो मुझको नादान जान
भरो खाली झोली माता ज्ञान का दो वरदान
बहुत बढ़िया
Comment by Rekha Joshi on June 4, 2012 at 7:05pm

Sandip ji bahut khub 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 4, 2012 at 4:31pm

आदरणीय संदीप जी, सादर 

सीखने का पर्याप्त आधार दिया , बधाई 


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on June 4, 2012 at 4:27pm

भाई संदीप जी बहुत सुन्दर रूप घनाक्षरी रची है. कथ्य और शिल्प के लिहाज़ से उत्तम, थोडा सा गेयता की तरफ विशेष ध्यान दिया करें तो सोने पर सुहागा हो जाएगा.   बहरहाल मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें.

Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on June 4, 2012 at 9:10am

बहुत बढ़िया संदीप भाई ! बधाई हो !

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