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अब दीप मुल्के इश्क में उन्माद चाहिए

रो मत अरे नादां नहीं ये आब चाहिए
दुनिया बदलने को दिलों में आग चाहिए

दहशत मिटे वहशत मिटे इस मुल्क से मेरे
बिस्मिल,भगत,अशफाक औ आज़ाद चाहिए

लड़ने बुराई से मिटाने गर्दिश-ए-वतन
चट्टान सा तन औ जिगर फौलाद चाहिए

उजड़ा चमन है मुल्क ये बंजर जमीं हुई
सींचो लहू गर ये चमन आबाद चाहिए

क्या शांति से होगा भला लाठी मिले अगर
अब दीप मुल्के इश्क में उन्माद चाहिए


संदीप पटेल "दीप"

Views: 583

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Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on June 12, 2012 at 7:12pm

दहशत मिटे वहशत मिटे इस मुल्क से मेरे ,बिस्मिल,भगत,अशफाक औ आज़ाद चाहिए.....वाह संदीप भाई क्या शेर है। मज़ा आ गया। वैसे तो पूरी ग़ज़ल ही बहुत खूबसूरत है लेकिन इस शेर का जवाब नहीं !! दाद कुबूल करें!!

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 12, 2012 at 3:12pm

आदरणीय संदीप जी, सादर 

बिलकुल सही फरमाया है आपने. बधाई.

Comment by Yogi Saraswat on June 12, 2012 at 10:38am

उजड़ा चमन है मुल्क ये बंजर जमीं हुई
सींचो लहू गर ये चमन आबाद चाहिए

क्या शांति से होगा भला लाठी मिले अगर
अब दीप मुल्के इश्क में उन्माद चाहिए

जोश जगाती बेहतरीन ग़ज़ल !

Comment by Arun Sri on June 12, 2012 at 10:23am

उजड़ा चमन है मुल्क ये बंजर जमीं हुई
सींचो लहू गर ये चमन आबाद चाहिए

बहुत बढ़िया सर जी !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 12, 2012 at 10:01am

bahut sundar aujpoorn ghazal....vaah

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on June 12, 2012 at 9:20am

aap sabhi aadarneey jano @AVINASH S BAGDE sir ji , @अरुण कान्त शुक्ला sir ji , @yogesh shivhare ji , kaa hriday se shukriya aur saadar aabhar

Comment by yogesh shivhare on June 11, 2012 at 9:14pm

लड़ने बुराई से मिटाने गर्दिश-ए-वतन
चट्टान सा तन औ जिगर फौलाद चाहिए  

बहुत सुन्दर रचना वीर रस में सनी हुई .बधाई

Comment by अरुण कान्त शुक्ला on June 11, 2012 at 8:34pm

दुनिया बदलने को दिलों में आग चाहिए... बधाई .

Comment by AVINASH S BAGDE on June 11, 2012 at 7:58pm


दहशत मिटे वहशत मिटे इस मुल्क से मेरे 

बिस्मिल,भगत,अशफाक औ आज़ाद चाहिए ...aaha ha..kya tewar hai kavita ke wah! Sandeep bhai wah!

लड़ने बुराई से मिटाने गर्दिश-ए-वतन 
चट्टान सा तन औ जिगर फौलाद चाहिए 

 

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