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कह मुकरियाँ

एक प्रयास किया है मुकरियाँ लिखने का दोस्तों आशा करता हूँ मार्गदर्शन मिलेगा

जब आती है नए ख्वाब दिखाती है
फिर अपनी बात से ही मुकर जाती है
उसको होती नहीं फिर हमारी दरकार
क्या मित्र सजनी ??? ना मित्र सरकार

जब आती है कली कली खिल जाती है
भंवरों के गुन्जन को गती मिल जाती है
उसके आने से मिल जाए दिल को करार
क्या मित्र सजनी ??? ना मित्र बहार

उसके बिना सब फीका सा लगता है
छप्पन भोग भी नीका न लगता है
उसकी कमी को पूरा करेगा कौन
क्या मित्र सजनी ???ना मित्र लोन (नमक)


गर्मियों मैं सुबह जल्दी आ जाती है
सारा दिन वो मेरी जान जलाती है
मुश्किल से जाती है होते ही शाम
क्या मित्र सजनी ??? ना मित्र घाम (धूप)

उसे चूमे चूसे बिना मजा नहीं आता है
उसके आगे तो सब फीका हो जाता है
बाग़ में जाता हूँ मजा लेने हर शाम
क्या मित्र सजनी ??? ना मित्र आम

टूट जाती है नींद जब वो आते हैं
कभी मीठे बेन औ कभी डराते है
उनसा नहीं कोई दूजा है अपना
क्या मित्र सजनी ??? ना मित्र सपना

संदीप पटेल "दीप"

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Comment

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Comment by Er. Ambarish Srivastava on July 19, 2012 at 4:01pm

धन्यवाद आदरेया सीमा जी !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 18, 2012 at 9:41am

सुन्दर प्रयास किया है संदीप जी जब मैंने लिखी थी मुझसे भी गलतियां हुई थी अब इसके बाद जो लिखोगे धमाल लिखोगे यही तो ओ बी ओ की खासियत है 

Comment by Rekha Joshi on July 17, 2012 at 3:29pm

आदरणीय संदीप जी 

जब आती है कली कली खिल जाती है
भंवरों के गुन्जन को गती मिल जाती है
उसके आने से मिल जाए दिल को करार
क्या मित्र सजनी ??? ना मित्र बहार ,वाह क्या बात है ,बहुत बढ़िया ,बधाई 
Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on July 15, 2012 at 9:39pm

उसे चूमे चूसे बिना मजा नहीं आता है 
उसके आगे तो सब फीका हो जाता है 
बाग़ में जाता हूँ मजा लेने हर शाम
क्या मित्र सजनी ??? ना मित्र आम 

बहुत सुन्दर संदीप जी ....कोशिशें रंग लाती ही हैं ..बाग़ में धमाल 

जय श्री राधे 
भ्रमर ५ 

 

Comment by AVINASH S BAGDE on July 14, 2012 at 11:21pm


क्या मित्र सजनी ??? ना मित्र बहार ...nice kah-mukariya

उसे चूमे चूसे बिना मजा नहीं आता है 
उसके आगे तो सब फीका हो जाता है 
बाग़ में जाता हूँ मजा लेने हर शाम
क्या मित्र सजनी ??? ना मित्र आम 

संदीप पटेल "दीप"ji wah..

 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on July 14, 2012 at 6:17pm
प्रिय संदीप जी
सुन्दर प्रयास है, कह मुकरी लिखने का, बस मात्राएँ १६-१६ साध लें, बहुत आसानी से ये मुकरियाँ शिल्पगत और गेय हो जाएँगी. बधाई इस प्रयास के लिए.
Comment by Er. Ambarish Srivastava on July 14, 2012 at 4:33pm

मित्र संदीप जी,  कह-मुकरी की प्रत्येक पंक्ति में १६ मात्राएँ अनिवार्य होने के साथ-साथ कह कर मुकर जाना अति आवश्यक होता है|  आपका प्रयास बहुत अच्छा है ....जिसके लिए आपको बहुत-बहुत बधाई !  आपकी सुविधा के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत है ....

जब भी आती ख्वाब दिखाती                १६ मात्रा
मुकरे निज से फिर भी भाती                 १६ मात्रा
जिसके बिना न हिलता पत्ता                 १६ मात्रा
क्या वह सजनी ? नहिं यह सत्ता !     १६ मात्रा

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