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"अरे ! ये क्या!! मनु दीदी तुम तो कह रही थी की तुम्हारा बजट केवल पांच सौ रुपयों का ही था!! ये गणपति जी की शानदार मूर्ती तो हजार रुपयों से क्या कम होगी!!" शाम को सुनंदा ने अपनी बड़ी बहन के घर गणेश स्थापना की पूजा के लिये घुसते ही कहा.
'अरे! क्या बताऊँ!! हम मूर्तियाँ खरीदने गए थे तो वहां हमारी काम वाली बाई भी मिल गई. उसने पांच सौ वाली मूर्ति उठा ली तो हमारे पास हजार वाली उठाने के अलावा कोई चारा ही नहीं था...."
गहरी उदासी के साथ मनु बोली......
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अविनाश बागडे.....नागपुर.

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Comment by MARKAND DAVE. on October 13, 2012 at 8:48am

गहरी उदासी के साथ…!

 

यह लधुकथा वर्तमान समाज का दर्पण है..! वाह क्या लेखन है, बहुत ही बढ़िया ।

Comment by Shubhranshu Pandey on September 23, 2012 at 11:58am

चलो गणनायक तो आ गये.

..गणपति बप्पा मोरया...पुढ्यावर्षी लौकरिया.....

Comment by AVINASH S BAGDE on September 21, 2012 at 8:00pm
 
आभार लक्षमण  प्रसाद जी...
Comment by AVINASH S BAGDE on September 21, 2012 at 7:59pm
भाई लोकेश सिंह जी...शुक्रिया...
 
Comment by AVINASH S BAGDE on September 21, 2012 at 7:58pm
 
शुक्रिया राजेश कुमारी मेम...
Comment by AVINASH S BAGDE on September 21, 2012 at 7:58pm
बहुत-बहुत आभार सौरभ जी..
 

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on September 20, 2012 at 7:39pm

एक सधी हुई लघुकथा है, आदरणीय अविनाश भाईजी.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 20, 2012 at 5:23pm

भगवान् भी मूल्यों में तौले जाने लगे जैसे कम कीमत के भगवान् तो कृपा कम करेंगे दिखावा आस्था पर हावी है जो आपकी लघु कथा अच्छी तरह से समझाने में सफल है बहुत बधाई अविनाश जी 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on September 20, 2012 at 10:24am
अमीर लोग निम्न अथवा गरीब के सामने अपना standard (स्तर)
 उंचा दिखाने का या हूँ कहे  गरीब  को नीचा दिखाने का प्रयास करते है 
उसपर गहरा व्यंग करती अच्छी लघु कथा, बधाई आदरणीय अविनाश बागडेजी  
Comment by लोकेश सिंह on September 20, 2012 at 9:54am

"झूठी शान करे हलाकान  " किसी ने ठीक ने  ही कहा है , ईश्वर तो भाव के भूखे है दिखावे के नहीं ,और हम ईस्वर की पूजा प्रार्थना में भी दिखावा करते है ,उनके दरबार में क्या अमीर क्या गरीब सभी बराबर है ,दिखावे पे करार व्यंग छोटी मगर सार्थक ,बहुत बहुत साधुवाद ...लोकेश सिंह

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