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दस हाइकु 
***********
जहर धीमा 
परोसते चेनल 
चरम सीमा 
-------------
चपलता है 
तन-मन स्वस्थ है 
सफलता है 
--------------
चेहरा भाव 
मन की परिस्थिती 
हंसते घाव 
--------------
जंगली फूल 
लान  की हरियाली 
क्यूँ प्रतिकूल ?
--------------
बहती नदी 
कटते यूँ किनारे 
यही है बदी !!
-----------
जूनी शराब 
नयी-नयी  बोतल 
देखो शवाब।
------------
पाखंडी बना 
लालच था पैसों का 
शिखंडी बना!!!
---------
पर्वतमाला 
खुद पर दुशाला 
धरा ने डाला।
---------
बोली चिड़िया 
बरगद के तले 
गयी पीढियां 
--------
जागरण है 
सुबह का सूरज 
क्या स्मरण है?
-------------------
अविनाश बागडे 

Views: 683

Comment

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Comment by Er. Ambarish Srivastava on October 12, 2012 at 6:55pm

धन्यवाद श्री अविनाश जी !

Comment by AVINASH S BAGDE on October 12, 2012 at 6:46pm
 
संदीप पटेल भाई।।।आभार आपके शब्द-बल का 
Comment by AVINASH S BAGDE on October 12, 2012 at 6:46pm
 
अशोक रक्ताले जी ,ह्रदय से आभार।
 
Comment by AVINASH S BAGDE on October 12, 2012 at 6:45pm
शुक्रिया !राजेश कुमारी मेम ..
 
Comment by AVINASH S BAGDE on October 12, 2012 at 6:43pm

आदरणीय योगराज प्रभाकर

आपका समर्थन पा  कर हर्ष हुआ।।।आभार।

Comment by AVINASH S BAGDE on October 12, 2012 at 6:41pm
डॉ . प्राची सिंह मेम 
आपका आभारी हूँ।।
Comment by AVINASH S BAGDE on October 12, 2012 at 6:39pm
लक्षमण लड़ीवाला जी 
प्रकृति से आपका प्रेम देख भला लगा।
Comment by AVINASH S BAGDE on October 12, 2012 at 6:36pm

Er.

अम्बरीश जी।।
बहुत-बहुत आभार आपका।
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on October 12, 2012 at 5:44pm

पर्वतमाला 
खुद पर दुशाला 
धरा ने डाला।
जागरण है 
सुबह का सूरज 
क्या स्मरण है?
हाइकु के माध्यम से सुंदर चित्र उकेरा है प्रकृति का बहुत बधाई आदरणीय अवनाश एस बागडेजी  

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 12, 2012 at 3:37pm

आ. अविनाश बागडे जी, बहुत बढ़िया हाइकू लिखे है..हार्दिक बधाई 

कृपया ध्यान दे...

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