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मुझे तलाश है उस भोर  की ,जो नव दिव्य चेतना भर दे |

निज लक्ष्य  से ना हटें कभी 

अटूट  निश्चय पे डटें सभी 

ना सत्य वचन  से फिरें कभी 

ना निज मूल्यों से गिरें कभी 

जो गर्दन नीची कर दे 

मुझे तलाश है उस भोर  की ,जो नव दिव्य चेतना भर दे |

दूजों के दुःख अपनाएँ हम 

 अक्षत पुष्प बरसायें हम 

नेह  का निर्झर  बहायें हम

जग  के संताप मिटायें हम

भगवन ऐसा अवसर दे 

मुझे तलाश है उस भोर  की ,जो नव दिव्य चेतना भर दे |

प्रीत प्रकृति नव्य सृजन करे 

पूर्ण  समर्पित हिय भाव भरे 

तन मन  में सिमटी व्याधि हरे 

कलुषित कलंकित  भाव झरें 

मति संयत  उन्नत कर दे 

मुझे तलाश है उस भोर  की ,जो नव दिव्य चेतना भर दे |

नई शक्ति का समावेश हो 

अनुद्दत आचरण विशेष  हो 

ना आक्रोश  ना आवेश हो 

नव्यजीवन सूत्र विशेष हो 

नवगीतों में नव स्वर दे   

मुझे तलाश है उस उस भोर  की ,जो नव दिव्य चेतना भर दे |

***********************************************  

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 2, 2012 at 4:30pm

बहुत बहुत हार्दिक आभार अशोक कुमार रक्तेला जी 

Comment by Ashok Kumar Raktale on October 2, 2012 at 3:44pm

दूजों के दुःख अपनाएँ हम 

 अक्षत पुष्प बरसायें हम 

नेह  का निर्झर  बहायें हम

जग  के संताप मिटायें हम

भगवन ऐसा अवसर दे 

वाह! बहुत सुन्दर रचना.हार्दिक बधाई स्वीकारें.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 25, 2012 at 8:32am

प्रिय विशाल चर्चित जी हार्दिक आभार आपको रचना पसंद आई 

Comment by VISHAAL CHARCHCHIT on September 25, 2012 at 12:42am

आलस्य एवं निराशा की नीरवता को तोड्ती हुई.......तन - मन के तारों को नव उमंग - नव उत्साह से झकझोरती हुई इस अत्यन्त उत्कृष्ट रचना को  नमन !!!!!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 24, 2012 at 6:42pm

आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी आपकी प्रतिक्रिया से तो लेखनी को और उर्जा मिलती है मन प्रसन्न हो गया हार्दिक आभार 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on September 24, 2012 at 1:04pm

इस ऊर्जस्वी और ओजस्वी रचना के लिये हार्दिक बधाई, आदरणीया राजेशजी.

सादर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 23, 2012 at 8:26pm

प्रिय रेखा जी बहुत बहुत धन्यवाद आपको रचना पसंद आई स्नेह बनाए रखिये 

Comment by Rekha Joshi on September 23, 2012 at 7:53pm

नई शक्ति का समावेश हो 

अनुद्दत आचरण विशेष  हो 

ना आक्रोश  ना आवेश हो 

नव्यजीवन सूत्र विशेष हो 

नवगीतों में नव स्वर दे   

मुझे तलाश है उस उस भोर  की ,जो नव दिव्य चेतना भर दे |,अति सुंदर रचना आदरणीया राजेश जी ,हार्दिक बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 23, 2012 at 2:01pm

प्रिय प्राची जी आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on September 23, 2012 at 1:42pm
बहुत सुन्दर रचना आदरणीय राजेश कुमारी जी..
मुझे तलाश है उस भोर की, जो नव दिव्य चेतना भर दे...हार्दिक बधाई  

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