नेता खुद करते फिरें, इधर उधर की ऐश
दीवाली पर ना मिले, तेल, कोयला, गैस
तेल, कोयला, गैस, चूल्हा जलेगा कैसे
रंक भाड़ में जाय, भरलो बैंक में पैसे
वोट दियो पछताय, मनुज अब जाकर चेता
उजले हैं परिधान, ह्रदय से काले नेता
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Comment
हार्दिक आभार फूल सिंह जी आपको भी दिवाली की शुभकामनाएं
राजेश जी प्रणाम.......
सुंदर अतिसुंदर भावपूर्ण रचना......"सपरिवार सहित आपको शुभ दीपावली"
फूल सिंह
बहुत सुन्दर व्यंगात्मक कुण्डलिया के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें आदरणीया राजेश जी
हार्दिक आभार प्रदीप कुमार जी आपको आपके परिवार को भी दिवाली की शुभकामनाएं
आदरणीया राजेश कुमारी जी, सादर अभिवादन
शानदार रचना.
दीपावली की सपरिवार शुभकामनाएं.
सादर आभार सौरभ जी
सादर आभार, आदरणीया, कि आपने मेरे कहे का मान रखा.
देखिये, ऐडमिन अपना काम कर गये .. :-)))
प्रिय प्राची जी आपको कुंडलियाँ पसंद आई मेरी लेखनी को उर्जा मिली ह्रदय से शुक्रिया
हार्दिक आभार सौरभ पाण्डेय जी आपकी पारखी नजर के क्या कहने आप बिलकुल सही कह रहे हैं यहाँ काले ही होना चाहिए क्या यह शब्द आप एडिट कर सकते हैं? या मैं फिर से पोस्ट करूँ
सुन्दर सटीक सामयिक कुण्डलिया के लिए बधाई आदरणीया राजेश कुमारी जी
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