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विजय मिली है, सदा विजय हो।
भारतमाता की जय-जय हो॥

बेटों के उर लगन लगी है।
विश्वविजय की चाह जगी है॥
उनके बल का कभी न क्षय हो।
भारतमाता की जय-जय हो॥

ले के दलबल निकल पड़े हैं।
कर अस्त्रों से भरे पड़े हैं॥
लगते ऐसे हुई प्रलय हो।
भारतमाता की जय-जय हो॥

क्रोधानल से नैन लाल हैं।
नाहर सम नख-मुख विशाल हैं॥
देख जिसे भय को भी भय हो।
भारतमाता की जय-जय हो॥

अरिसेना सब भाँप रही है।
थर-थर करती काँप रही है॥
अतिशीघ्र नवयुग का उदय हो।
भारतमाता की जय-जय हो॥

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Comment

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Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on November 23, 2012 at 3:10pm

हार्दिक आभार आदरणीय रक्ताले सर 

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on November 23, 2012 at 3:09pm

बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय रविकर सर 

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on November 23, 2012 at 3:09pm

हार्दिक आभार आदरणीय कुशवाहा सर 

Comment by Ashok Kumar Raktale on November 19, 2012 at 8:26pm

क्रोधानल से नैन लाल हैं।
नाहर सम नख-मुख विशाल हैं॥
देख जिसे भय को भी भय हो।
भारतमाता की जय-जय हो॥.......................वाह!

बहुत सुन्दर रचना आद. गौरव जी. बधाई स्वीकारें.

Comment by रविकर on November 17, 2012 at 6:13am

बहुत बढ़िया आदरणीय ।।

भारत माता की जय हो -

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on November 16, 2012 at 3:03pm

अरिसेना सब भाँप रही है।
थर-थर करती काँप रही है॥
अतिशीघ्र नवयुग का उदय हो।
भारतमाता की जय-जय हो॥

जय भारत 

वंदे मातरम 

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