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कौन बचाए अस्मित माँ की

देश चलाने वाले ही जब बिकने को तैयार खड़े हों
पैदा होते ही बचपन का पालन पोषण कर्ज तले हो
आम आदमी के घर में हो दो रोटी की खातिर दंगे
कौन बचाए अस्मित माँ की जिसके लाल दलाल बने हों ।।

धर्म नाम की धोखेबाजी मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे में
रक्तपात के उपदेशों का पाठ चल रहा हर द्वारे में
घोटालों की राजनीति में सब गुदड़ी के लाल पड़े हों
कौन बचाए अस्मित माँ की जिसके लाल दलाल बने हों ।।

हिजड़ों की बस्ती के दर्शन दिल्ली के दरबार मिलेंगे
संचालक मैडम के आसन दस जनपथ के पार सजेंगे
संसद में दाखिल वो होगा जिसके करतल खून सने हो
कौन बचाए अस्मित माँ की जिसके लाल दलाल बने हों ।।

सरकारी गुंडे खाखी में खादी पहने अपराधी हैं
चोर -चोर मौसेरे हैं सब धेय एक बस बर्बादी है
कुर्सी पर बैठे हैं कुत्ते दुर्लभ दर्शन यदि करने हों
कौन बचाए अस्मित माँ की जिसके लाल दलाल बने हों ।।

हे सूर्यवंश के रघुवर राया चन्द्र वंश के केशव कान्हा
ये मेरा भारत डूब रहा है जल्दी से दर्शन दे जाना ।।
आर्यों की इस धर्म भूमि पर पुनः महाभारत रचने दो
कौन बचाए अस्मित माँ की जिसके लाल दलाल बने हों ।।........... मनोज

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on December 7, 2012 at 9:19am

मनोज नौटियाल जी, इस व्यस्था के दोहरेपन पर जनमानस के आक्रोश को बहुत खूब शब्द देकर अभिव्यक्त किया है...हार्दिक बधाई 

Comment by वीनस केसरी on December 7, 2012 at 3:17am

समाज की दुर्दशा का सचित्र वर्णन कर दिया भई

रचना खूप पसंद आई
हार्दिक बधाई स्वीकारें
शुभकामनाएं


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 6, 2012 at 9:25pm

कहन से समृद्ध उच्च भाव-रचना के लिये बधाई, भाई मनोजजी.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on December 6, 2012 at 9:15pm

नौटियाल साहब,इस रचना में आपने देश की हकीक़त को रख दिया है, बहुत ही सार्थक रचना बन पड़ी है, हां एक बात कहूँगा कि मेरे समझ से शब्द अस्मत या अस्मिता है अस्मित नहीं |

इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें |

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on December 6, 2012 at 4:10pm

बहुत सुन्दर लिखा है आदरणीय बधाई आपको

Comment by MAHIMA SHREE on December 6, 2012 at 4:09pm

 देश के वर्तमान   दयनीय हालात पर उपजा आपका आक्रोश ... सबकुछ कह गया ..

 हार्दिक बधाई आपको मनोज जी//

Comment by लतीफ़ ख़ान on December 6, 2012 at 12:31pm

जनाब मनोज नौटियाल जी ,,, देश की दुर्दशा और राजनीतिज्ञों के घिघौने कारनामों पर उंगली उठाती सशक्त रचना पर  हार्दिक बधाई ...

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 6, 2012 at 11:43am

बेहद गहन अभियक्ति सर बहुत ही प्रभावशाली पंक्तियाँ बधाई स्वीकारें

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on December 6, 2012 at 11:35am

हे सूर्यवंश के रघुवर राया चन्द्र वंश के केशव कान्हा 
ये मेरा भारत डूब रहा है जल्दी से दर्शन दे जाना ।।
आर्यों की इस धर्म भूमि पर पुनः महाभारत रचने दो 
कौन बचाए अस्मित माँ की जिसके लाल दलाल बने हों ।।....बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति हार्दिक बधाई स्वीकारे 

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