For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मुल्क की इस पाक माटी को मुबारक हो ये साल

मुल्क की इस पाक माटी को मुबारक हो ये साल
संग सी वीरों की छाती को मुबारक हो ये साल

चल पडा है कारवाँ अधिकार अपने मांगने
इस बगावत करती आंधी को मुबारक हो ये साल 

आग हर दिल में जला दी फूंक के डर का कफ़न 
हो चली रुखसत जो बेटी को मुबारक हो ये साल

हर बदी को टालने नेकी खड़ी है ढाल बन 
उस मुबारक पाक नेकी को मुबारक हो ये साल

है यही गंगा यही जमजम अगर तौबा करो
इस गिरे आँखों के पानी को मुबारक हो ये साल

जो बिना सोचे बिना समझे किसी से हो गयी 
"दीप" इस  नादान यारी को मुबारक हो ये साल 

संदीप पटेल "दीप"

Views: 516

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by अमि तेष on January 4, 2013 at 10:38am

दुःख और आक्रोस ......... पर रचना अच्छी है ..

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on January 3, 2013 at 3:48pm

आदरणीय अशोक सर, आदरणीय गुरुदेव सौरभ सर, बंधुवर अनंत भाई , आदरणीया डॉ प्राची जी , आदरणीया सीमा जी आप सभी को सादर प्रणाम सहित
नव वर्ष की ढेरों शुभकामनाएं ,
आपने मेरी ग़ज़ल को पढ़ के मुबारक कर दिया
अपना ये स्नेह और आशीर्वाद यूँ ही बनाये रखिये

Comment by अरुन 'अनन्त' on January 3, 2013 at 12:32pm

संदीप भाई नव वर्ष की ढेरों शुभकामनायें, आपकी सोंच को सलाम काश यही सोंच हमारे देश के नवजवानों में जागृत हो जाये तो कल्याण हो जाए, बहरहाल प्रेरणादाई ग़ज़ल हेतु दिली दाद कुबुलें. सादर

Comment by seema agrawal on January 2, 2013 at 9:26pm

बहुत सुन्दर और ज़िम्मेदार ग़ज़ल कही है संदीप ...हर एक शेर विशेष और बहुत दिल से लिखा गया है बहुत बहुत बधाई  इस खूबसूरत ग़ज़ल के लिए

 हर बदी को टालने नेकी खड़ी है ढाल बन 
उस मुबारक पाक नेकी को मुबारक हो ये साल .....ढेर सारी आशा पिरो दी है इस शेर ने इस मायूसी के माहौल में 

है यही गंगा यही जमजम अगर तौबा करो 
इस गिरे आँखों के पानी को मुबारक हो ये साल ......दुःख का सावन  दर्द की गर्द को ज़रूर धोएगा  

जो बिना सोचे बिना समझे किसी से हो गयी 
"दीप" इस  नादान यारी को मुबारक हो ये साल....बहुत सुन्दर 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on January 2, 2013 at 4:58pm

बहुत बढ़िया ग़ज़ल प्रिय संदीप जी 

हर शेर अपने आप में ख़ास है. 

आग हर दिल में जला दी फूंक के डर का कफ़न 
हो चली रुखसत जो बेटी को मुबारक हो ये साल,

यह शेर बेहद पसंद आया .

हार्दिक बधाई 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 2, 2013 at 9:47am

भाई संदीपजी, आपको भी मुबारक हो ये साल .. .

आपकी संवेदनशीलता वाकई बहुत कुछ देखती है.विशेषकर ये दो शेर बहुत पसंद आये -

आग हर दिल में जला दी फूंक के डर का कफ़न 
हो चली रुखसत जो बेटी को मुबारक हो ये साल

है यही गंगा यही जमजम अगर तौबा करो
इस गिरे आँखों के पानी को मुबारक हो ये साल

इस बढिया ग़ज़ल के लिए बधाई.

Comment by Ashok Kumar Raktale on January 1, 2013 at 9:57pm

चल पडा है कारवाँ अधिकार अपने मांगने
इस बगावत करती आंधी को मुबारक हो ये साल ........वाह! जज्बा सलामत रहे.

सुन्दर गजल आदरणीय संदीप जी. आपको भी मुबारक यह नया साल. शुभकामनाएं. 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Tuesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Monday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Apr 3
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
Apr 3
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"सार्थक है आपका सुझाव "
Mar 31
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभाजी ।  इसमें कुछ कमी हो सकती है लेकिन इस प्रकार के आयोजन शहरों…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, बिना सोचे बोलने के परिणाम पर सुन्दर और संतुलित लघुकथा…"
Mar 31

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service