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मुल्क की इस पाक माटी को मुबारक हो ये साल

मुल्क की इस पाक माटी को मुबारक हो ये साल
संग सी वीरों की छाती को मुबारक हो ये साल

चल पडा है कारवाँ अधिकार अपने मांगने
इस बगावत करती आंधी को मुबारक हो ये साल 

आग हर दिल में जला दी फूंक के डर का कफ़न 
हो चली रुखसत जो बेटी को मुबारक हो ये साल

हर बदी को टालने नेकी खड़ी है ढाल बन 
उस मुबारक पाक नेकी को मुबारक हो ये साल

है यही गंगा यही जमजम अगर तौबा करो
इस गिरे आँखों के पानी को मुबारक हो ये साल

जो बिना सोचे बिना समझे किसी से हो गयी 
"दीप" इस  नादान यारी को मुबारक हो ये साल 

संदीप पटेल "दीप"

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Comment

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Comment by अमि तेष on January 4, 2013 at 10:38am

दुःख और आक्रोस ......... पर रचना अच्छी है ..

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on January 3, 2013 at 3:48pm

आदरणीय अशोक सर, आदरणीय गुरुदेव सौरभ सर, बंधुवर अनंत भाई , आदरणीया डॉ प्राची जी , आदरणीया सीमा जी आप सभी को सादर प्रणाम सहित
नव वर्ष की ढेरों शुभकामनाएं ,
आपने मेरी ग़ज़ल को पढ़ के मुबारक कर दिया
अपना ये स्नेह और आशीर्वाद यूँ ही बनाये रखिये

Comment by अरुन 'अनन्त' on January 3, 2013 at 12:32pm

संदीप भाई नव वर्ष की ढेरों शुभकामनायें, आपकी सोंच को सलाम काश यही सोंच हमारे देश के नवजवानों में जागृत हो जाये तो कल्याण हो जाए, बहरहाल प्रेरणादाई ग़ज़ल हेतु दिली दाद कुबुलें. सादर

Comment by seema agrawal on January 2, 2013 at 9:26pm

बहुत सुन्दर और ज़िम्मेदार ग़ज़ल कही है संदीप ...हर एक शेर विशेष और बहुत दिल से लिखा गया है बहुत बहुत बधाई  इस खूबसूरत ग़ज़ल के लिए

 हर बदी को टालने नेकी खड़ी है ढाल बन 
उस मुबारक पाक नेकी को मुबारक हो ये साल .....ढेर सारी आशा पिरो दी है इस शेर ने इस मायूसी के माहौल में 

है यही गंगा यही जमजम अगर तौबा करो 
इस गिरे आँखों के पानी को मुबारक हो ये साल ......दुःख का सावन  दर्द की गर्द को ज़रूर धोएगा  

जो बिना सोचे बिना समझे किसी से हो गयी 
"दीप" इस  नादान यारी को मुबारक हो ये साल....बहुत सुन्दर 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on January 2, 2013 at 4:58pm

बहुत बढ़िया ग़ज़ल प्रिय संदीप जी 

हर शेर अपने आप में ख़ास है. 

आग हर दिल में जला दी फूंक के डर का कफ़न 
हो चली रुखसत जो बेटी को मुबारक हो ये साल,

यह शेर बेहद पसंद आया .

हार्दिक बधाई 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 2, 2013 at 9:47am

भाई संदीपजी, आपको भी मुबारक हो ये साल .. .

आपकी संवेदनशीलता वाकई बहुत कुछ देखती है.विशेषकर ये दो शेर बहुत पसंद आये -

आग हर दिल में जला दी फूंक के डर का कफ़न 
हो चली रुखसत जो बेटी को मुबारक हो ये साल

है यही गंगा यही जमजम अगर तौबा करो
इस गिरे आँखों के पानी को मुबारक हो ये साल

इस बढिया ग़ज़ल के लिए बधाई.

Comment by Ashok Kumar Raktale on January 1, 2013 at 9:57pm

चल पडा है कारवाँ अधिकार अपने मांगने
इस बगावत करती आंधी को मुबारक हो ये साल ........वाह! जज्बा सलामत रहे.

सुन्दर गजल आदरणीय संदीप जी. आपको भी मुबारक यह नया साल. शुभकामनाएं. 

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