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दो-दोहे- अपने सुख की खोज में...

एक.

अपने सुख की खोज में,सब जा रहे विदेश।

वहां जा कर पता चला, कितना अच्छा देश।।

दो-

सब बदलने की कोशिश,करते हैं सब आज।

आदमी वहीं का वहीं, बदला नहीं समाज।।

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Comment by सूबे सिंह सुजान on January 13, 2013 at 10:52pm

जी   सौरभ जी........धन्यवाद


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 13, 2013 at 3:29pm

पहला दोहा ठीक-ठाक पर दूसरा मेहनत मांगता है.

Comment by सूबे सिंह सुजान on January 12, 2013 at 8:17pm

ji aap sabki baten sahi  v achchhi lagi hn


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 12, 2013 at 8:01pm

दोनों दोहें अच्छे हैं, कम से कम एक साथ ५ दोहें पोस्ट करें ताकि आनंद आ जाये | बधाई इस प्रस्तुति पर |

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on January 12, 2013 at 12:40pm

भावाभियक्ति पर हार्दिक बधाई

Comment by अरुन 'अनन्त' on January 12, 2013 at 12:38pm

मित्रवर प्रयास हेतु बधाई बाकी दीदी ने कह ही दिया है उनकी बातों पर ध्यान दें. सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on January 12, 2013 at 12:28pm

दोहा प्रयास के लिए बधाई सूबे सिंह जी 

अंतर्गेयता को अभी और साधने की ज़रुरत है. 

कृपया ध्यान दे...

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