For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

खरामा - खरामा चली जिंदगी,

खरामा - खरामा घुटन बेबसी,

भरी रात दिन है नमी आँख में,

खरामा - खरामा लुटी हर ख़ुशी,

अचानक से मेरा गया बाकपन,

खरामा - खरामा गई सादगी,

शरम का ख़तम दौर हो सा गया,

खरामा - खरामा मची गन्दगी,

जमाना भलाई का गुम हो गया,

खरामा - खरामा बुरा आदमी,

जुबां पे रखी स्वाद की गोलियां,

खरामा - खरामा जहर सी लगी.....

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 827

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Priya Ranjan on January 22, 2013 at 3:51pm

बढ़िया है जी.

Comment by अरुन 'अनन्त' on January 21, 2013 at 5:04pm

ह्रदय से आभार आदरणीया राजेश कुमारी जी.. आशीष बनाए रखें. सादर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on January 21, 2013 at 4:58pm

बढ़िया ग़ज़ल लिखी है प्रिय अरुण दाद कबूलें 

Comment by अरुन 'अनन्त' on January 20, 2013 at 1:54pm

आदरणीय भ्राताश्री प्रणाम, बेहद प्रसन्नता हुई की आपने अपना बहुमूल्य समय दिया मैं धन्य हुआ, यूँ ही अनुज पर स्नेह बनाये रखें हार्दिक आभार सादर.

Comment by Er. Ambarish Srivastava on January 20, 2013 at 1:47pm

//शरम का ख़तम दौर हो सा गया,

खरामा - खरामा मची गन्दगी,//

अरुण शर्मा 'अनंत' जी,

दिल से निकले शानदार अशआर के लिए बहुत बहुत बधाई स्वीकारें |

Comment by अरुन 'अनन्त' on January 20, 2013 at 1:35pm

आदरणीय श्री बागी सर आपके दिल से निकली वाह वाह मेरे दिल को छू कर दिल में घर कर गई, आपका स्नेह अच्छा और अच्छा लिखने को अग्रसर करता है. आशीष का हाँथ रखे रखें सादर.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 19, 2013 at 3:11pm

//शरम का ख़तम दौर हो सा गया,

खरामा - खरामा मची गन्दगी,//

बहुत खूब भाई , वाह वाह , यही दिल से निकल रहा है , बहुत ही उम्दा ख्याल है , अच्छी ग़ज़ल कही है दाद कुबूल करें ।

Comment by अरुन 'अनन्त' on January 18, 2013 at 5:42pm

माफ़ कीजिये सर परेशान कर रहा हूँ, राखी भी गलत है ये रखी है कृपया बदल दें. सादर

Comment by Admin on January 18, 2013 at 5:40pm

आदरणीय अरुन जी प्रणाम, इस रचना में गम की जगह गुम कर दिया गया ।

Comment by अरुन 'अनन्त' on January 18, 2013 at 5:32pm

आदरणीय एडमिन महोदय प्रणाम, इस रचना में कृपया गम की जगह गुम कर दें. सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
10 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
11 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
11 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
11 hours ago
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Jul 24
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service