For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

जीवन-मृत्यु
----------------
एक अदृश्य सी रेखा
जीवन मृत्यु के मध्य
चुनना अत्यंत कठिन
दोनों में से एक को
जीवन क्षणभंगुर
अकाट्य सत्य है
मृत्यु भी असत्य नहीं
जान लें इस भेद को
मृत्यु की छाती पर
नर्तन करता जीवन
पकड़ना चाँद लहरों में
बाँधना रेत का कठिन
चेत रे मन होश न खोना
जीवन है अमूल्य खरा सोना
सुन्दर जीवन जिया जाये
होय वही जो पिया मन भाये

  • प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा / २०-१-२०१३

Views: 522

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on February 20, 2013 at 5:30pm

धन्यवाद आदरणीय संदीप जी सादर 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on February 20, 2013 at 5:29pm

आदरणीय सौरभ गुरुदेव जी 

सादर 

इसका अर्थ है की रचना के अंत को सुधरने की जरूरत नहीं है अब.

स्नेह हेतु आभार 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on February 20, 2013 at 5:27pm

धन्यवाद ब्रजेश जी सादर 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on February 20, 2013 at 5:26pm

धन्यवाद आदरणीया उपासना जी सादर 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on February 20, 2013 at 5:25pm

धन्यवाद आदरणीय विशाल जी सादर 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on February 20, 2013 at 5:24pm

धन्यवाद 

आदरणीय लड़ीवाला जी 

सादर 

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on February 19, 2013 at 12:32pm

वाह वाह आदरणीय क्या बात है
कम शब्दों मे एक प्रभावी रचना
आपको इस रचना हेतु बधाई आदरणीय


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 19, 2013 at 12:04pm

इन अद्वितीय और उच्च भावों से भरी पंक्तियों को विलम्ब से देख पा रहा हूँ, आदरणीय प्रदीपजी. जिस सहज लहजे में आपने जीवन और मृत्यु के शाश्वत स्वरूप को आपने शब्द दिये हैं वह आपकी सतत विचार प्रक्रिया की बानगी है.

मृत्यु की छाती पर
नर्तन करता जीवन
पकड़ना चाँद लहरों में
बाँधना रेत का कठिन

कितनी सहजता और सरलता से भी आपके शब्द प्रकृति के जटिलतम स्वरूप को यहाँ बाँधते दीख रहे हैं ! वाह !!

यह आपकी गंगा-जमुनी वैचारिकता ही है कि गंभीरता की ओट में आप यह कह सके हैं. आपका सुफ़ियाना अंदाज़ बार-बार  कर रहा है -

सुन्दर जीवन जिया जाये
होय वही जो पिया मन भाये

इस रचना के लिए सादर धन्यवाद.

Comment by बृजेश नीरज on February 17, 2013 at 3:50pm

सुन्दर जीवन जिया जाये 
होय वही जो पिया मन भाये

बहुत सुन्दर!

Comment by upasna siag on January 24, 2013 at 4:00pm

जीवन का यही सत्य है .......बहुत सुन्दर 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आदमी क्या आदमी को जानता है -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई रवि जी सादर अभिवादन। गजल पर आपकी उपस्थिति का संज्ञान देर से लेने के लिए क्षमा चाहता.हूँ।…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
Friday
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
Friday
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
Friday
Sushil Sarna posted blog posts
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । "
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी सृजन पर आपकी समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । इंगित बिन्दु पर सहमत…"
Friday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर…"
Thursday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service