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मेरे गीत तेरी पायलिया है
ओ मीत तू मेरी सावरिया है|

प्रेम गीत मैं गा रहा हूँ
तेरे लिए ही आ रहा हूँ
मिलन को बरस रही बादरिया है
ओ मीत तू मेरी सावरिया है|

मद्धम हवा साथ चली है 
दिल में दीपक सी उजली है 
देख झलक गयी गागरिया है 
ओ मीत तू मेरी सावरिया है|

अगली पहर तक आ जाऊंगा 
तुझे दुल्हन बना मैं ले जाऊंगा 
नजरें उठा जरा तू दुल्हनिया है 
ओ मीत तू मेरी सावरिया है|

दीप्ति शर्मा 

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Views: 265

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on January 24, 2013 at 9:01am

मासूमियत लिए हुए है यह प्रस्तुति बधाई 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 23, 2013 at 10:38pm

आपकी इससे बेहतर रचनाएँ पढ़ कर मुग्ध हो चुका हूँ, दीप्तिजी. 

प्रस्तुति के लिए बधाई

Comment by deepti sharma on January 22, 2013 at 6:37pm

शुक्रिया राम शिरोमणि पाठक जी 

Comment by ram shiromani pathak on January 22, 2013 at 5:34pm

 सुन्दर रचना!!!!

कृपया ध्यान दे...

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