For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आओ दिल का दीया जला लो

सद्भावों की थोड़ी खूशबू

सरगम की आवाज बची है

आओ दिल का दीया जला लो

मुट्ठी में थोड़ी राख बची है

नई उमर के गर्म खून से

उठी हुई कुछ भाप बची है

श्रद्धा के कुछ बूंद जमे से

बचपन की एक शाख बची है

आओ दिल का.................

तेरी आरजू मेरी शिकायत

की मीठी तकरार बची है

जग से जाने के कुछ लम्‍हें

जीवन की सौगात बची है

आओ दिल का.................

घुटी व्‍यथा जो तुझमें,मुझमें

उसकी कुछ आवाज बची है

भींगे मन के कुछ पन्‍नों पर

यादों की झनकार बची है

आओ दिल का.................

कहो अलविदा तुम ना ऐसे

अभी तो थोड़ी दाद बची है

उमस धूल और सिहरन में भी

आशा की कुछ गाद बची है

आओ दिल का.................

राजेश कुमार झा

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 629

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 30, 2013 at 11:13pm

राजेशभाईजी, मैं अभी आपकी यह रचना देख पा रहा हूँ, खेद है. और जिस स्तर पर मैं आपके शब्द, उनके भावों को रख पा रहा हूँ आपकी रचना खूब सहयोग कर रही है. इसके लिए आप वस्तुतः अतिशय बधाई के पात्र हैं.

अबतक की प्रस्तुत रचनाओं को देख कर मैं यह दावे कह सकता हूँ कि गेयता और प्रवाह आपकी रचनाओं का महत्वपूर्ण विन्दु होने चाहिये. आप इसे निभाने का प्रयास भी करते हैं. लेकिन जाने क्यों प्रस्तुत रचना की पंक्तियाँ १६-१७-१८ की मात्राओं के बीच दोलन करती दिख रही है. 

फिर दृष्टि पड़ी डॉ.प्राची के सुझावों पर और मैं वस्तुतः उनके कहे में अपने सुझावों का अक्स देख पा रहा हूँ. सीमाजी ने भी इन तथ्यों की ओर स्पष्टतः इंगित किया है. विश्वास है, आप साझा किये गये सुझावों को अपनी बेहतरी के लिहाज से स्वीकार कर तदनुरूप प्रयासरत होंगे.

शुभेच्छाएँ.

Comment by अरुन 'अनन्त' on January 30, 2013 at 4:41pm

वाह क्या बात कही है बंधुवर मैं सहमत हूँ आपसे.

Comment by राजेश 'मृदु' on January 30, 2013 at 4:40pm

अरूण जी यही तो इस मंच की विशेषता है जहां आपको चलना ना भी आए तो भी ऊंगली पकड़कर चलना ही नहीं दौड़ना सिखा देते हैं और हर स्‍पर्श इतना स्‍नेहिल कि आप भागना चाहें तो आपका स्‍वयं का मन विद्रोह कर बैठता है । 

Comment by अरुन 'अनन्त' on January 30, 2013 at 4:36pm

राजेश भाई बहुत ही सुन्दर गीत है, पढ़ने में आनंद आ गया, आदरणीया प्राची दीदी के सुझाव के अनुसार पढ़ने में गेयता एवं प्रवाह बहुत ही सुन्दर लगा. हार्दिक बधाई स्वीकारें सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on January 30, 2013 at 3:49pm

इस नवगीत पर मेरे सुझाव का समसरोकार रख अनुमोदन करने के लिए आभारी हूँ आदरणीया सीमा जी , आदरणीय गणेश जी. सादर.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on January 30, 2013 at 3:46pm

मेरे कहे को मान देने के लिए सादर आभार आ. राजेश झा जी.

Comment by Prabhakar Pandey on January 29, 2013 at 5:10pm

बहुत ही सुंदर, सहज और यथार्थ रचना हेतु हार्दिक बधाई।

Comment by राजेश 'मृदु' on January 29, 2013 at 4:46pm

आप सबके स्‍नेह के लिए हृदय से आभारी हूं ।  प्राची जी, आपने जो सुझाव दिया है उनसे मुझे मेरे अकादमिक गुरुदेव की याद आ गई वे भी मेरे नोट्स को इसी तरह पंक्ति दर पंक्ति पढ़ कर सुझाव देते थे । आपके सुझावों के लिए आपका बेहद शुक्रगुजार हूं कि इतने धैर्य के साथ आपने रचना पढ़ी एवं आवश्‍यक सुधारों की ओर ध्‍यान खींचा । मैं मूल रचना में आपके समस्‍त सुझावों को ज्‍यों का त्‍यों रख रहा हूं, सादर

Comment by seema agrawal on January 27, 2013 at 12:12pm

बहुत खूबसूरत गीत राजेश जी ...भावों और कल्पना,और शब्द चयन  की दृष्टि से निसंदेह आप की लेखन क्षमता बहुत उच्चस्तरीय है ...परन्तु भावनाओं में गति की लडखडाहट नहीं होनी चाहिए  प्राची ने  बहुत कुछ स्पष्ट किया है और बेहद सटीक और उपयुक्त सुझाव भी दिए हैं ........जिसके लिए प्राची भी  प्रशंसा की हक़दार हैं 

गीत के लिए आपको बधाई एवं शुभकामनाएँ 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 26, 2013 at 3:06pm

सुन्दर नवगीत बना है , बधाई आदरणीय राजेश जी , डॉ प्राची जी ने बहुत महत्वपूर्ण सुझाव दिया है ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)

बह्र: 22 22 22 22 22 2 रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिएजंगल का कानून है पहला, चुप रहिएमँहगाई से…See More
1 hour ago
रोहित डोबरियाल "मल्हार" posted a blog post

दास्तां

एक हो दास्तां तो सुनाएं,लंबी है कहानी, फिर कभी।मिले थे जिस जगह इक उम्र पहले,वो धुंधली सी निशानी,…See More
1 hour ago
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

समय

समय को दोष देना क्यूँ समय जीना सिखाता है समय की गति सुनिश्चित है समय ही तो विधाता है।। समय का खेल…See More
1 hour ago
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सौरभ जी"
2 hours ago
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"उम्मीद है कि इस पटल से संबंधित कोई अच्छी खबर आएगी।"
8 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' shared their blog post on Facebook
Sunday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ravi Shukla जी"
Sunday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ashok Kumar Raktale जी"
Sunday
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

माँ

माँ यह शब्द नहींं केवलइस जग की माँ से काया है। हम सबकी खातिर अतिपावन माँ के आँचल की छाया है।१।माँ…See More
May 19
Dayaram Methani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अगर आप यों घबरा कर मैदान छोड़ देंगे तो जिन्होने एक जुट होकर षड़यन्त्र किया है वे अपनी जीत मानेंगे।…"
May 19
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अब, जबकि यह लगभग स्पष्ट हो ही चुका है कि OBO की आगे चलने की संभावना नगण्य है और प्रबंधन इसे ऑफलाइन…"
May 18

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service