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१३-१४ साल के आसपास की उम्र होगी उसकी ! शायद कुछ अंडे चुराए थे उसने ! बस इसीलिए लोग उसे बेतहाशा पीट रहे थे ! कहीं से पुलिस को इत्तला हुई ! पुलिस पहुंची ! बहुत मशक्कत हुई, पर लोग उसे बख्शने को तैयार न थे ! आखिर पुलिस को लाठीचार्ज और हवाई फायर करना पड़ा ! दो-चार लोग घायल हुवे, पर उसे बचा लिया गया ! अगले दिन खबर थी, “जनता के रक्षक हुवे भक्षक” ये खबर खूब चली ! पुलिस ने इस खबर को देखा और अगले मामले में शांत रही ! कोई लाठीचार्ज, कोई हवाई फायर नही ! अगले दिन खबर थी, “पब्लिक की सरेआम गुण्डागर्दी, पुलिस बनी मूकदर्शक” खैर ! ये खबर भी खूब चली !

-पियुष द्विवेदी ‘भारत’

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by पीयूष द्विवेदी भारत on February 4, 2013 at 10:50pm

आपको कथा बेहतर लगी, ये जान के इसके प्रति काफी आश्वस्त हुवा ! बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय सौरभ जी !

Comment by पीयूष द्विवेदी भारत on February 4, 2013 at 10:48pm

आपने कथा को सराहा, धन्यवाद आदरणीय अशोक भाई जी ...!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 4, 2013 at 8:17pm

सही-सच्ची कर्तव्यनिष्ठा आज की भेड़चाल के कारण किस दुर्दशा को झेल रही है इसका बढिया प्रस्तुतिकरण हुआ है. पत्रकारिता के नाम पर जो हल्कापन तारी हुआ है वह कभी-कभी डरा भी देता है कि ऐसा दायित्व निर्वहन समाज का कौन सा भला कर रहा हैं ! जन-आक्रोश में भी बला की दिशाहीनता है.

एक अच्छी लघु कथा को साझा करने के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद, पियुष भाईजी.

Comment by Ashok Kumar Raktale on February 4, 2013 at 9:10am

भाई पियूष द्विवेदी जी सादर, यही सच्चाई है. आज ही अखबार में खबर है लड़की को ससम्मान बुलाकर शिकायत लिखी गयी. कल की खबर थी लड़की ने टेलीफोन कर तंग करने की शिकायत की थी तो पुलिस ने कहा था - फोन ही तो किया है हाथ तो नहीं पकड़ा है.सादर.

Comment by पीयूष द्विवेदी भारत on February 3, 2013 at 2:26pm

धन्यवाद आदरणीय लक्ष्मण जी एवं आदरेया राजेश कुमारी  जी !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 3, 2013 at 1:51pm

पूछ कर देखो तो अपनी सफाई में हर पुलिस वाले के दिल की यही कहानी है जनता किसी भी तरह नहीं बक्श्ती ,हमारे देश के नेता भी यही कहते हैं जनता कुछ तो सुधरो ,बेचारों को जीने दो ,बहरहाल सच्चाई बयान करती इस लघु कथा हेतु बधाई पियूष जी 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on February 3, 2013 at 1:14pm
सुन्दर लघु कथा बधाई श्री पियूष द्वेदी 'भारत' -
चौथा खम्भा पुलिस का करता ऐसा कार्य 
विवेक से नहीं, कार्य करता बेसिर पैर का 
कोप भाजन बने सदा ही जनता जनार्दन का 
सुर्ख़ियों में रहता रहे, ग्रास बने मीडिया का।

 

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