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प्रियतम मेरे 

फिर वही शाम वही तन्हाई 
दिल में मेरे वही दर्द ले कर आई 
....................................
प्रियतम मेरे 
ढूँढ़ रही है बेचैन निगाहें 
कहाँ खो गये दुनिया की भीड़ में
......................................
प्रियतम मेरे
मजनू बना प्यार में तेरे 
आईना भी नही पहचानता मुझे
.....................................
प्रियतम मेरे 
दर्देदिल ने कुछ ऐसा किया 
हो गया मै तुम्हारा उम्र भर के लिए
........................................
प्रियतम मेरे
हो न जाऊं कहीं पागल मै 
स्वाती अमृत की बूंद मुझे दे 
......................................
मौलिक और अप्रकाशित रचना 

Views: 765

Comment

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 18, 2013 at 11:59pm

सुफ़ियाना अंदाज़ अच्छा लगा, रेखा जी.

इस रचना पर बधाई स्वीकरें. ..

Comment by Rekha Joshi on February 18, 2013 at 7:46pm

आ तुषार जी ,आ अशोक जी ,आ विजय जी ,आ प्रवीन जी ,आ मीना जी आप सभी का प्रोत्साहन हेतु  हार्दिक धन्यवाद ,आभार 

Comment by Meena Pathak on February 18, 2013 at 6:54pm

सादर नमस्कार जी ...... बहुत सुन्दर रचना .. बधाई 

Comment by Parveen Malik on February 18, 2013 at 11:36am

रेखा जी सादर नमस्कार,

सुन्दर रचना ... बधाई हो 

Comment by vijay nikore on February 18, 2013 at 8:47am

आदरणीया रेखा जी:

 

भावों की सुन्दर अभिव्यक्ति।

 

विजय निकोर

Comment by Ashok Kumar Raktale on February 18, 2013 at 8:29am

सुन्दर रचना आदरणीया रेखा जी सादर.

Comment by Tushar Raj Rastogi on February 17, 2013 at 8:32pm

बहुत भावपूर्ण रचना | बधाई

Comment by Rekha Joshi on February 17, 2013 at 7:17pm

आदरणीय बागी जी ,संदीप जी ,पाठक जी ,रचना पसंद करने पर आप का हार्दिक धन्यवाद ,आभार सभी मित्रों का 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 17, 2013 at 12:27pm

निष्ठुर प्रियतम को पुकारती एक अच्छी रचना , बधाई स्वीकार करें ।

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on February 17, 2013 at 11:22am

मन के भावों को शब्द दे दिए आपने .........वाह

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