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क्यूंकि तुम प्रेम हो और प्रेम मैं भी हूँ .......

मैं प्रेम हूँ 

तुम भी तो प्रेम ही हो 

प्रेम से हट कर 

क्या नाम दूँ 

तुम्हें भी और मुझे भी ...

कितनी सदियों से 

और जन्मो से भी 

हम साथ है 

जुड़े हुए एक-दूसरे के 

प्रेम में 

हर जन्म में तुमसे 

मिलना हुआ 

लेकिन मिल के भी मेल 

ना हो सका 

प्रेम फिर भी रहा 

तुम में और मुझ में भी 

चलते जा रहें है 

समानांतर रेखाओं की तरह 

साथ हो कर भी साथ नहीं 

दिखावे की है लेकिन ये 

समानांतर रेखाए 

प्रेम ने तो अब भी बांधा 

हुआ है 

तुम्हें  भी और मुझे  भी 

क्यूंकि तुम प्रेम हो और 

प्रेम मैं भी हूँ .......

( अप्रकाशित और मौलिक  )

Views: 788

Comment

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Comment by vijay nikore on March 6, 2013 at 1:47am

आदरणीया उपासना जी:

 

प्रेम की इतनी सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए बधाई।

 

विजय निकोर

 

Comment by asha pandey ojha on March 5, 2013 at 2:28pm

prem par ek sundar w gahree rachna ,, bahut sundar dear Upasana ji

Comment by DINESH PAREEK on March 4, 2013 at 12:23pm

बहुत खूब सुन्दर  लाजबाब अभिव्यक्ति।।।।।।

मेरी  नई  रचना  
आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के  इंतजार में  

Comment by बृजेश नीरज on March 3, 2013 at 3:19pm

बहुत सुन्दर।

Comment by वेदिका on March 3, 2013 at 11:23am

संतुतित रूप में लाजबाब अभिव्यक्ति ! बधाई :)


सादर वेदिका 

Comment by कवि - राज बुन्दॆली on March 1, 2013 at 10:49pm

वाह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह क्या बात है सुन्दर,,,,,,,,,,,बधाई,,,,,,,,,,,,

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on March 1, 2013 at 10:45pm

क्या बात है प्रेम पर बहुत सुन्दर रचना................बहुत बहुत बधाई स्वीकार कीजिये


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 1, 2013 at 10:20pm

प्रेम निर्बाध नदी के दो किनारों की तरह भी है जो दूर् होकर भी हमेशा नदी के साथ रहते हैं और अपनी परछाई की  तरह भी  जो हमारे साथ रहती है अपना ही दूसरा रुप है| प्रेम ही शक्ति प्रेम ही पूजा है ,बहुत सुंदर प्रस्तुति उपासना जी हार्दिक बधाई आपको| 

Comment by Abhinav Arun on March 1, 2013 at 10:19pm

आदरणीया उपासना जी , बहुत सरल शब्दों में गहन रचना . अनुभूति के धरातल पर सफल और पगी हुई . हार्दिक बधाई !!

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 1, 2013 at 10:03pm

सुन्दर आभिव्यक्ति के लिए बधाई, सही है हम सब एक दुसरे से प्रेम के डोर से ही बंधे होते है, सने रखते है 

प्रेम पर आपका द्रष्टिकोण सुंदर है बधाई 

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