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मूँगफली खा चच्चा बोले 

बहू आज कुछ चने भिगोले 

कल को रोटी संग बनाना 

जरा चटपटे आलू-छोले l

 

सारा दिन तू काम में पिस्से 

सुने पड़ोसी के भी किस्से 

सखियों से गपशप करती है 

कर देंगी वो घर के हिस्से l

 

मारा बहु ने घर में पोंछा 

मुँह सिकोड़ बातों पर सोचा 

खुद तो इत-उत गप्प लड़ाते  

फिर क्यों मेरा ही मुँह कोंचा l  

-शन्नो अग्रवाल 

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Comment

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Comment by vijay nikore on March 7, 2013 at 3:52pm

आदरणीया शन्नो जी:

रोचक रचना के लिए बधाई।

विजय निकोर

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 7, 2013 at 3:43pm

सारा दिन तू काम में पिस्से 

सुने पड़ोसी के भी किस्से 

सखियों से गपशप करती है 

कर देंगी वो घर के हिस्से l

चाचा सही कहते हैं 

बधाई 

सादर आदरणीया 

Comment by Dr.Ajay Khare on March 7, 2013 at 3:18pm

bahut badhiya rachna badhai


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 7, 2013 at 2:21pm

हम्म... ससुरजी और बहु के मध्य हुआ संवाद रोचक ढंग से प्रस्तुत हुआ है. यानि इतने दिनों आप ऐसे-ऐसे मनोरंजक संवादों का ही मजा ले रही थीं !

अब मैं समझा आपके गुम होने का मतलब-

घर ही में तो आपके माहौल तारी था ....   हा हा हा हा....   :-)))))))))

स्वागत है आदरणीया शन्नोजी.. .  आपके आने से रौनक आ गयी, रंग आगया .. .

Comment by ram shiromani pathak on March 7, 2013 at 11:41am

आदरणीया  शन्नो अग्रवाल सुन्दर भाव रचना के लिए हार्दिक बधाई!!!!!!!!!!

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 7, 2013 at 10:42am

यथार्थ कथ्य पर सुन्दर भाव रचना के लिए हार्दिक बधाई आदरणीया शन्नो अग्रवाल जी, प्रथम पंक्तियों में मनोरंजन, मध्य में व्यंग ओउर अंत में परिणामतः निष्कर्षात्मक सोच, अच्छी रचना बन पड़ी है 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on March 7, 2013 at 10:12am

कल को रोटी संग बनाना 

जरा चटपटे आलू-छोले l.............सचमुच हमारे भी मुँह में पानी आ गया...

सखियों से गपशप करती है 

कर देंगी वो घर के हिस्से l..................चच्चा की उम्र का सबसे जायज डर है...हाहाहा ( वैसे सचमुच आज कल किटी वगैरह में दो विवाहित सहेलियों के बीच ऐसी ही बाते होती हैं)

ससुर और बहू की वार्ता को और उनके मनोभावों को बहुत ही रोचक ढंग से प्रस्तुत किया है आदरणीया शन्नो जी 

आपकी रचनाओं की खासियत है उनकी जीवन्तता.

सादर बधाई 

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