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जाने क्यों आजकल

जब भी

देखता / सुनता हूँ ख़बरें

तो धड़कते दिल से

यही सुनना चाहता हूँ

न हो किसी आतंकी घटना में

किसी मुसलमान का हाथ...

 

अभी जांच कार्यवाही हो रही होती है

कि आनन्-फानन

टी वी करने लगता घोषणाएं

कि फलां ब्लास्ट के पीछे है

मुस्लिम आतंकवादी संगठन...

 

बड़ी शर्मिंदगी होती है

बड़ी तकलीफ होती है

कि मैं भी तो एक मुसलमान हूँ

कि मेरे जैसे

अमन-पसंद मुसलमानों के बारे में

काहे नहीं सोचते आतंकवादी...

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Comment

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Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 6, 2013 at 1:31pm

मैं भी तो एक मुसलमान हूँ

कि मेरे जैसे

अमन-पसंद मुसलमानों के बारे में

काहे नहीं सोचते आतंकवादी..

वे मुसलमान नही आतंकवादी हैं

बस  

बधाई. सादर 

Comment by विजय मिश्र on March 18, 2013 at 1:08pm

अनवर भाई ! मन की अंतर्व्यथा को जिस सहजता से व्यक्त किया आपने , श्रद्धायोग्य है और सच तो ये है कि सारी इंसानियत ही सकते में है . जनाब ये दौर भी गुजर जायेगा और जुर्म की कोई पैदाइस जात नहीं होती . हाँ , इन आग से खेलने वालों को इसका पता नहीं  . साधुवाद 

Comment by Yogi Saraswat on March 11, 2013 at 11:30am

बड़ी शर्मिंदगी होती है

बड़ी तकलीफ होती है

कि मैं भी तो एक मुसलमान हूँ

कि मेरे जैसे

अमन-पसंद मुसलमानों के बारे में

काहे नहीं सोचते आतंकवादी...

मन की वेदना को बढ़िया  दिए हैं आपने !

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 11, 2013 at 10:59am

आपके भावो को सलाम श्री अनवर सोहेल भाई, विचारशील, संवेदनशील आप जैसे व्यक्तियों द्वारा ही यह 

जागरूकता लाइ जाकर किसी समाज पर मुट्ठी भर लोगो के कारण लगे धब्बे को धोया जा सकता है | 

आखिर शारीर में खून तो सबका ही लाल है | आवश्यकता है तो आप जैसे लोगो की जो समाज की 

सोच, दिशा और दशा बदल सकते है |

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on March 10, 2013 at 8:00pm

कि मेरे जैसे

अमन-पसंद मुसलमानों के बारे में

काहे नहीं सोचते आतंकवादी...

बहुत ही सुन्दर विचार! पर आतंकवादी का कोई धर्म नहीं होता वे सिर्फ आतंकवादी होते हैं!

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on March 10, 2013 at 11:37am

उत्तम विचारों को समेटे सुन्दर कविता !!!
एक सच्चा दर्द जाहिर किया आपने इस कविता द्वारा |
हार्दिक शुभकामनायें आदरणीय अनवर जी |

Comment by asha pandey ojha on March 9, 2013 at 10:43pm

आदरणीय अनवर जीआपकी पीड़ा बहुत जायज है पूरी कौम को क्यों शर्मिंदगी ढोनी पड़े चंद सरफिरों के कारन ..अमन परस्त लोगों को बड़ी तकलीफ़ होती है ,आपके ज़ज्बातों को दिल से सलाम 

Comment by ram shiromani pathak on March 9, 2013 at 7:25pm

आदरणीय अनवर जी:

 इस सोच ने हमे सोचने पे मजबूर कर दिया है

बधाई ................

Comment by bhushan singh on March 9, 2013 at 6:52pm
आप के इस सोच ने हमे सोचने पे मजबूर कर दिया है कि हमारा भारत वाकाई महान है, जहां अाप जैसे लोग रहते है , बधाई

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 9, 2013 at 3:13am

जिस एकाकी पीड़ा को आप जैसे लोग जीने को अभिशप्त हैं, वही पीड़ा उन राक्षसों की विजयगाथा लिखती है. हृदय से निस्सृत भाव सटीक शब्द पा जायँ वही कविता है.

बधाई व शुभकामनाएँ

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