For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल "उड़ा न देना कहीं आँख से ये तू पानी"

====== ग़ज़ल========

वो दौर और था जिसमे था आबरू पानी
नहीं उबाल रहा अब के है लहू पानी

नदी में फेंक दिए हमने आज कुछ कंकर
दिखा रहा था मेरा अक्स हू-ब-हू पानी

नया है दौर हुई रस्में यहाँ भाप मगर
उड़ा न देना कहीं आँख से ये तू पानी

क्या बंजरों में कहीं ढूँढना है हरियाली
यहाँ तो जूस्तजू है आब आरजू पानी

क्या "दीप" जा रहे हो फिर नदी किनारे तुम
सँभल के बैठना करता है गुफ्तगू पानी


संदीप पटेल "दीप"

Views: 582

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 16, 2013 at 7:43am

विलम्ब से आपकी ग़ज़ल पर आ रहा हूँ. सो अधिक कुछ क्या कहना.  फिर भी यह अवश्य कहूँगा कि पानी में कंकर फेंकने वाला बिम्ब बहुत ही सुखकर लगा है.

यह अवश्य है कि हरियाली स्त्रीलिंग की तरह प्रयुक्त होती है.

शुभेच्छाएँ.

Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on March 15, 2013 at 8:18am

नदी में फेंक दिए हमने आज कुछ कंकर 
दिखा रहा था मेरा अक्स हू-ब-हू पानी....

संदीप ये शेर दिल की गहराइयों तक पहुंचा....एक शेर पूरी ग़ज़ल पर भरी पद रहा है....मकता भी लाजवाब है....दाद कुबूल हो...

Comment by Dr.Ajay Khare on March 14, 2013 at 3:18pm

नदी में फेंक दिए हमने आज कुछ कंकर 
दिखा रहा था मेरा अक्स हू-ब-हू पानी pani mai aks dikh raha to raam teri ganga maili kese ho gai badhai sunder gajal ke liye

 

Comment by Yogi Saraswat on March 14, 2013 at 12:08pm

नया है दौर हुई रस्में यहाँ भाप मगर
उड़ा न देना कहीं आँख से ये तू पानी

क्या बंजरों में कहीं ढूँढना है हरियाली
यहाँ तो जूस्तजू है आब आरजू पानी

बहुत खूब संदीप जी

Comment by वीनस केसरी on March 14, 2013 at 12:08am

बहुत खूब भाई
यह दो अशआर खास तौर पर अच्छे लगे
ढेरों दाद ....

नदी में फेंक दिए हमने आज कुछ कंकर

दिखा रहा था मेरा अक्स हू-ब-हू पानी


क्या "दीप" जा रहे हो फिर नदी किनारे तुम

सँभल के बैठना करता है गुफ्तगू पानी

Comment by बृजेश नीरज on March 13, 2013 at 9:48pm

वाह क्या बात है! बहुत खूब!

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 13, 2013 at 9:34pm

आदरणीय श्री संदीप कुमार पटेल जी, "यहाँ तो जूस्तजू है आब आरजू पानी" आपके गजल ने मुझे मंत्र मुग्ध कर दिया! बहुत बहुत बधाई!

 

Comment by ram shiromani pathak on March 13, 2013 at 9:26pm

क्या "दीप" जा रहे हो फिर नदी किनारे तुम 
सँभल के बैठना करता है गुफ्तगू पानी!!!!!!!!बहोत खूब आदरणीय !हार्दिक  बधाई 

 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post अनसुने अनकहे के बीच
"आ. भाई विजय जी, सादर अभिवादन। अच्छी रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post कुंडलिया. . . . झोला
"आ. भाई सुनील जी सुंदर कुंडलियां हुई हैं हार्दिक बधाई।"
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted blog posts
Wednesday
sushil yadav posted blog posts
Oct 26
Sushil posted blog posts
Oct 26
vijay nikore posted a blog post

अनसुने अनकहे के बीच

                        अनसुने अनकहे के बीच.कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बातउसपर अनकहे एहसासों का…See More
Oct 26
रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Oct 15
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service