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कुण्डलियाँ छंद - लक्ष्मण लडीवाला

 
सहन करे आलोचना, नेता वही महान,
ताने सहना सीख ले, नेता असली  मान |
 नेता असली मान, मन में राज छुपाय ले,  
संख्या बल का भान, समर्थन भी जुटाय ले |
वोटो का रख मान, गिद्ध द्रष्टि इनपर धरे,
समय का रखे ध्यान, लात भी वह सहन करे| 
.
(2)
सच का साहस जो करे,तनहा वह रह जाय  
देर तक खामोश  रहे, सन्नाटा छा जाय |
सन्नाटा छा जाय, पर नहि जमीर बेचना,
साथ अगर हो नाथ, नहीं फिर तम से डरना|
चुने दर्द का साथ,  खेल है यह हिम्मत का,
कह लक्ष्मण कविराय,जुटाले साहस सच का|

 

 
- लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला    

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Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 7, 2013 at 10:48am

मुझे भी अभी तक कुंडलियाँ लिखने का पूर्ण अब्यास नहीं है, इस मच पर किखने के उद्देश्य से ही टिपण्णी द्वारा 

एक दुसरे को सिखाने सिखाने का अवसर मिलता है | आपका हार्दिक आभार श्री एस के चौधरी जी 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 7, 2013 at 10:42am

रचना तो लिखिही नेताजी के लिए है, नेता के गुणों के आधार पर नेताजी आत्म-विश्लेषण करे तो अच्छा हो |

रचना की भाव अभिव्यक्ति पसंद करने के लिए आपका हार्दिक आभार शालिनी कौशिक जी 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 7, 2013 at 10:39am

रचना चाहे छंद में लिखे या छंद मुक्त, भाव अगर किसी को प्रेरित कर सके तो ही रचना है वर्ना केवल कथ्य | 

आपको रचना के भाव पसंद आये, यह मेरा सौभाग्य है | आपका हार्दिक आभार आदरणीया परवीन मालिक जी 

Comment by shalini kaushik on April 7, 2013 at 12:27am
सहन करे आलोचना, नेता वही महान,
ताने सहना सीख ले, असली नेता मान |
नेता असली मान, मन में राज छुपाय ले,
संख्या बल का भान, समर्थन भी जुटाय ले |
वोटो का रख मान, गिद्ध द्रष्टि इनपर धरे,
समय का रखे ध्यान, लात भी वह सहन करे|
bahut sahi v sundar abhivyakti.netaji agar ek nazar dal len to aanand aa jaye .
Comment by Parveen Malik on April 6, 2013 at 12:54pm

छंद का तो मुझे कोई ज्ञान नहीं आदरणीय पर रचना में जो भाव हैं बेहद प्रेरणादायक हैं ... बधाई लीजिये !

कृपया ध्यान दे...

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