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नववर्ष

नव वर्ष हमारा आ भी गया, शुभ कामना छा भी गया।
इक वर्ष हमारा गुजर गया,इक वर्ष हमारा बढ़ भी गया।।

हम इस वर्ष को प्यार करें, मिलकर शांति बिहार करे।
नहीं जात-पात आडम्बर हो,मिल सम्प्रदाय विचार करें।।

यहां आतंक वाद की बेला है,चहुं दिश जग अंधियारा है।
इस वर्ष के नूतन प्रभात से, हमको आतंक मिटाना है।।

नववर्ष हमारा हो मंगल, जन-जन की विकृति दूर करें।
न भेद-भाव न धर्म-देश, विश्वबंधुत्व का स्वर गूंज करें।।

सत्यम/मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 19, 2013 at 9:31am

आदरणीया    गीतिका वेदिका जी,   जी मैम!  आपने बिलकुल सही कहा।   डर तो लगता है। आ0 गुरूवर जी से तो बहुत ही ज्यादा।  अगर घिघ्घी नहीं बंधेगी तो सीखूंगा कैसे?  गलती तो है।  और जब गलती समझ में आती है तो हंसी भी आती है।  आपका बहुत बहुत धन्यवाद...आपको भी हंसी आई...। सादर,

Comment by वेदिका on April 19, 2013 at 12:05am

हा हा हा :)))))) माफ़ कीजिये केवल प्रसाद जी! ऐसे लगा की आदरणीय सौरभ सर मानो क्लास आपको लाइव डांट रहे हो और आपकी मानो घिघ्घी बंध गयी और मै मुहँ छुपा के शैतान बच्चे की तरह हँस रही होऊं :)))))

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 18, 2013 at 11:33pm

आदरणीय गुरूवर सौरभ जी, जी सर, क्षमा करें, मात्र तुक बंदी हित में लिखा।  पुनः क्षमा प्रार्थना।  सादर,


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 18, 2013 at 9:06pm

नव वर्ष हमारा आ भी गया, शुभ कामना छा भी गया.. . . ये क्या है भाई ? कामना शुभ हो या अशुभ पुल्लिंग कबसे होने लगी ?

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 12, 2013 at 8:14pm

आ0 राम शिरामणि पाठक जी,  प्रिय मित्र, आपका बहुत बहुत आभार सहित हार्दिक धन्यवाद। सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 12, 2013 at 8:12pm

आ0 प्रदीप कुमार कुशवाहा जी,  आपका बहुत बहुत आभार सहित हार्दिक धन्यवाद। सादर,

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 12, 2013 at 6:34pm

स्नेही प्रसाद जी 

निश्चित हों सफल 

लें ऐसा संकल्प 

कामना रहे न अधूरी 

बधाई 

Comment by ram shiromani pathak on April 11, 2013 at 8:41pm

हम इस वर्ष को प्यार करें, मिलकर शांति बिहार करे।
नहीं जात-पात आडम्बर हो,मिल सम्प्रदाय विचार करें।।

आदरणीय बड़े भाई बहोत सुन्दर/

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 11, 2013 at 8:10pm

आदरणीय संदीप कुमार पटेल जी,  जी, मैं आपके बात से सहमत हूं। हां, ऐसा हो जाता है। किन्तु अब मैं आपके सुझाव को गंभीरता से ले रहा हं। सार्थक सुझाव के लिए धन्यवाद सहित आभार,


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on April 11, 2013 at 7:22pm

नव वर्ष पर शुभ भावों के लिए बधाई केवल प्रसाद जी.

आ० संदीप जी के कहे से सहमत हूँ... कि आपकी रचनाओं में  संप्रेषणीयता जल्दबाजी की भेंट चढ़ जाती है...

विशवास है आप ध्यान देंगे और रचनाकर्म को सुगढ़ करेंगे.

शुभकामनाएँ 

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