For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कुण्डलियां

सुधार के बाद पुनः प्रस्तुत

हॅसी हुदहुद खंजन से, पिकहु कूक रहि जाय।

बुलबुल मैना खग गुने, सुगा भी टेटियाय।।

सुगा भी टेटियाय, काग कांव कांव करता।

चातक बया तिलेर, टिटेहरी टेर कसता।।

बगुला रखता मौन, हंस गौरैया सरसीं।

मयूर बुलाय कौन, खिलखिल सब चिडि़यां हॅसीं।।

के0पी0सत्यम/मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 687

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 14, 2013 at 9:26pm

आ0 प्रदीप कुमार सिंह जी,  उत्साह बढ़ाने हेतु मैं आपका हार्दिक अभारी हूं।   सादर,

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 14, 2013 at 5:25pm

सुन्दर प्रयास 

बधाई 

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 14, 2013 at 3:50pm

आदरणीय रामशिरोमणि पाठक जी, प्रिय मित्र!  उत्साह वर्धन हेतु  आपका तहेदिल से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार। सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 14, 2013 at 3:47pm

आदरणीया राजेश कुमारी जी, जी सर!  आपकी बात से मैं पूर्णता सहमत हूं। लेकिन मुझे कम्प्यूटर ज्ञान कम होने के कारण ही डरता हूं कि कहीं जो है वह भी गायब न हो जाए, अक्सर ऐसा हो जाता है। फिरभी मैं कोशिश कर रहा हूं। आपके मार्गदर्शन एवं उत्साह वर्धन हेतु  आपका तहेदिल से बहुत बहुत आभार। सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 14, 2013 at 3:40pm

आ0 अशोक कुमार रक्ताले जी, जी सर!  आपकी बात से मैं पूर्णता सहमत हूं।  आपके मार्गदर्शन हेतु  आपका तहेदिल से बहुत बहुत आभार। सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 14, 2013 at 3:36pm

आ0 संदीप कुमार पटेल जी, जी आपने सही कहा है। आपका बहुत बहुत आभार। सादर,

Comment by ram shiromani pathak on April 14, 2013 at 1:38pm

आदरणीय केवल जी!सुन्दर प्रयास है.बधाई आपको 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 14, 2013 at 10:47am

केवल प्रसाद जी सुधार के बाद काफी बेहतर हुई है कुण्डलिया प्रयास रत रहें दूसरे  ध्यान रहे की कुंडलिया की शुरुआत ऐसे  अक्षर से हो जिसमे दो दीर्घ आयें क्योंकि अंत उसी अक्षर से होना होता है चूंकि हँसी के ह में चन्द्र बिंदु होने से ह लघु हो गया है इस और ही संदीप जी ने ध्यान आकर्षित किया है आप अपनी ये रचना एडिट कर सकते हैं टिप्पणियाँ वहीँ रहेंगी दुबारा अप्रूव जल्दी ही हो जाएगा ,बहुत-बहुत बधाई आपको प्रकृति की सुन्दरता को कैद किया है आपने शब्दों में |

Comment by Ashok Kumar Raktale on April 13, 2013 at 10:49pm

आदरणीय केवल प्रसाद जी सादर, अच्छा सुधार हुआ है. सतत प्रयास और भी सुधार कराएगा.बहुत बहुत आभार.बधाइयां

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on April 13, 2013 at 9:36pm

आदरणीय केवल जी सादर 

रचनाकर्म में प्रयास रत रहने हेतु बधाई आपको 

रचना के बारे में जो अशोक सर ने कहा उससे सहमत हूँ 

तत एक बात 

रोले के अंत में दो दीर्घ अनिवार्यतः होना ही चाहिए 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

माँ

माँ यह शब्द नहींं केवलइस जग की माँ से काया है। हम सबकी खातिर अतिपावन माँ के आँचल की छाया है।१।माँ…See More
Tuesday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अगर आप यों घबरा कर मैदान छोड़ देंगे तो जिन्होने एक जुट होकर षड़यन्त्र किया है वे अपनी जीत मानेंगे।…"
Tuesday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अब, जबकि यह लगभग स्पष्ट हो ही चुका है कि OBO की आगे चलने की संभावना नगण्य है और प्रबंधन इसे ऑफलाइन…"
Monday
amita tiwari posted a blog post

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें बेगुनाही और इन्साफ की बात क्यों सोचती हैं ये औरतें चुपचाप अहिल्या बन…See More
May 15
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
May 14
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय बाग़ी जी एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्यगण !बहुत दुखद है कि स्थिथि बंद करने तक आ गयी है. आगे…"
May 13

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, आपकी भावनाओं और मंच के प्रति आपके जुड़ाव को शब्द-शब्द में महसूस किया जा सकता…"
May 13
amita tiwari and आशीष यादव are now friends
May 11
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
May 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service