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दो घनाक्षरियां / संदीप कुमार पटेल

(1)

सुनो मृगनयनी है चाँद जैसा मुख इसे,
ओढनी ओढ़ा के आज, थोडा शरमाइए
घूरते क्यूँ हमें ऐसे, मैं हूँ जानवर जैसे
लोग सब देख रहे, नज़रें हटाइए
ऐसे ही खड़ी हो काहे, गघरी झुलात कहो
प्रेम है यदि तो फिर, उसे न छुपाइए
और यदि है नहीं तो, काम एक कीजिए जी
मुझे घूरने से अच्छा, नीर भर लाइए । 

(2)

मिले कल नेता जी तो , पूछ लिया हमने ये
कद्दू जैसी तोंद का ये, राज तो बताइए
दुबले थे आप कुर्सी मिलने से पहले तो
हुआ ये कमाल कैसे, अब न छुपाइए
बोले सुनो दीप भाई, श्रम बिना हो कमाई
चंदा दे के लोग बोलें, काम ये बनाइए
बैठे बैठे लील रहे, लाखों क्या करोड़ों हम
हो सके तो आप भी ये, योग अपनाइए । 

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Comment

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Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on April 17, 2013 at 3:36pm

आदरणीय योगी जी
रचना को सराहने और उत्साहवर्धन हेतु आपका बहुत बहुत आभार
स्नेह यूँ ही बनाए रखिए

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on April 17, 2013 at 3:35pm

आदरणीया शालिनी जी इस सराहना हेतु आपका बहुत बहुत आभार
स्नेह यूँ ही बनाए रखिए

Comment by Yogi Saraswat on April 17, 2013 at 11:58am

मिले कल नेता जी तो , पूछ लिया हमने ये
कद्दू जैसी तोंद का ये, राज तो बताइए
दुबले थे आप कुर्सी मिलने से पहले तो
हुआ ये कमाल कैसे, अब न छुपाइए
बोले सुनो दीप भाई, श्रम बिना हो कमाई
चंदा दे के लोग बोलें, काम ये बनाइए
बैठे बैठे लील रहे, लाखों क्या करोड़ों हम
हो सके तो आप भी ये, योग अपनाइए ।

वाह साब वाह , बहुत खूब

Comment by shalini kaushik on April 17, 2013 at 1:00am
मिले कल नेता जी तो , पूछ लिया हमने ये
कद्दू जैसी तोंद का ये, राज तो बताइए
दुबले थे आप कुर्सी मिलने से पहले तो
हुआ ये कमाल कैसे, अब न छुपाइए
बोले सुनो दीप भाई, श्रम बिना हो कमाई
चंदा दे के लोग बोलें, काम ये बनाइए
बैठे बैठे लील रहे, लाखों क्या करोड़ों हम
हो सके तो आप भी ये, योग अपनाइए ।
very right sanddep ji.
Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on April 16, 2013 at 9:18pm

आदरणीय अशोक सर जी सादर प्रणाम 

रचना की सराहना हेतु बहुत बहुत आभार 

स्नेह यूँ ही बनाए रखिये 

सादर 

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on April 16, 2013 at 9:17pm

आदरणीया डॉ प्राची जी सादर प्रणाम 

आपकी सराहना और उत्साहवर्धन हेतु बहुत बहुत आभार 

स्नेह यूँ ही बनाये रखिये 

सादर 

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on April 16, 2013 at 9:16pm

आदरणीय केवल जी सादर 

तारीफ के लिए शुक्रिया 

स्नेह यूँ ही बनाये रखिये 

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on April 16, 2013 at 9:15pm

आदरणीय राम भाई सादर 

सराहना हेतु बहुत बहुत आभार आपका 

स्नेह यूँ ही बनाये रखिये सादर 

Comment by Ashok Kumar Raktale on April 16, 2013 at 8:51pm

आदरणीय संदीप जी सादर, बहुत सुन्दर घनाक्षारियां हास्य से भरपूर। वाह! मजा आ गया. बहुत बहुत बधाई स्वीकारें .


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on April 16, 2013 at 7:36pm

बैठे बैठे लील रहे, लाखों क्या करोड़ों हम 
हो सके तो आप भी ये, योग अपनाइए । ............योग अपनाइए ..हाहाहा हाहाहा 

प्रवाहमय बढिया हास्य घनाक्षरी छंदों के लिए बधाई संदीप जी 

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