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जो गीत ह्रदय से निकला हो

जो गीत ह्रदय से निकला हो , कागज़ पे लिखो बेमानी है ।

वो गीत ह्रदय पर लिखना, ही जीवन की प्रेम कहानी है |

जब दिल में प्रेम उमड़ता है, आँखों से आंसू बहते हैं ,

मोती हैं समझने वालों को, नासमझो को तो पानी है ।

हर प्रेमी अपने प्रियतम को, हर हाल में पान चाह रहा ,

नासमझ भला ये क्या जाने, प्रेम तो तो एक कुर्बानी है ।

जब प्रेम दिलों में फूटे तो, वो सबके लिए बराबर हो ,

पर प्रेम में भेद भी होता है, इस बात पे ही है हैरानी है ।

जब गीत मोहब्बत ने गाये, ढाये हैं सितम ज़माने ने ,

फूलों की राहो में काँटे ,दुनिया की रीत पुरानी है ।

जिस प्रेम में उठती मांग रहे , उसे वासना ही समझो ,

गहरी समझ समर्पण की , प्रेम की यही निशानी है ।

नीरज 

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Comment by Neeraj Nishchal on June 4, 2013 at 2:53pm

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय अशोक कुमार जी

Comment by Neeraj Nishchal on June 4, 2013 at 2:52pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय राजेश पाण्डेय जी

Comment by Ashok Kumar Raktale on June 3, 2013 at 8:18pm

आदरणीय नीरज जी सुन्दर प्रवाहमयी रचना बहुत बहुत बधाई स्वीकारें अंतिम बंद के प्रथम पद में भाव अधूरे हैं. "प्रेम तो तो एक कुर्बानी है" शायद टंकन त्रुटी है. 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 1, 2013 at 11:30pm

सुन्दर प्रयास के लिए बहुत-बहुत बधाइयाँ ...

शुभेच्छाएँ

Comment by Neeraj Nishchal on May 28, 2013 at 3:36pm

अभिनव आरुण जी बहुत बहुत धन्यवाद 

Comment by Neeraj Nishchal on May 28, 2013 at 3:35pm

जवाहरलाल जी बहुत बहुत धन्यवाद  

Comment by Neeraj Nishchal on May 28, 2013 at 3:34pm

केवल प्रसाद जी बहुत बहुत आभार

Comment by Neeraj Nishchal on May 28, 2013 at 3:31pm

आदरणीय प्राची जी आपकी बातों का अगली रचनाओं में ध्यान रखूंगा
साभार बहुत बहुत धन्यवाद
सादर  

Comment by Neeraj Nishchal on May 28, 2013 at 3:30pm

 धन्यवाद प्रियंका जी

Comment by Neeraj Nishchal on May 28, 2013 at 3:28pm

साभार आदरणीय मीना जी 

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