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राम सिया की भक्ति/ चौपाई एवं दोहों में (जवाहर)

रामसिया का रूप
राम सिया की जोड़ी कैसी, काम रती की जोड़ी जैसी.
राम सिया को जो नर ध्यावे, सब सुख आनंद वो पा जावे.
राम सिया जग के सुख दाता, जो मांगे वर वो पा जाता.
शुबह शाम नर नाम सुमीर तू, अपना काम समय पर कर तू.
कष्ट न दूजे को दे देना, सम्भव हो तो दुःख हर लेना.
परमारथ सा धरम न दूजा, नहीं जरूरत कोई पूजा.
वेद्ब्यास मुनि सब समझावे, गाथा बहु विधि कहहि सुनावे.
अन्तकाल में कष्ट जो पावे, सकल अतीत समझ में आवे.
कहत जवाहर हे रघुराई, मूरख मन से करौं बराई.
मरा मरा कह बाल्मिकी, बन गए मुनि महान.
मैं बालक अति मूढ़ मति, जानत सकल जहान.
सियावर राम चन्द्र की जय!

( मौलिक व अप्रकाशित )

-जवाहर लाल सिंह 

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Comment by JAWAHAR LAL SINGH on June 15, 2013 at 7:13pm

आदरणीय श्री केवल प्रसाद जी, सादर अभिवादन!

सराहना पूर्ण प्रतिक्रिया के लिए आपका हार्दिक आभार!

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on June 14, 2013 at 9:06pm

आ0 जवाहर सर जी,   सुन्दर भावों से पूरित चौपाई व दोहा शानदार प्रस्तुति।  हार्दिक बधाई स्वीकारें।    सादर,

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on June 14, 2013 at 4:15pm

आदरणीया विजयाश्री जी, जय सिया राम जय जय सिया राम !

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on June 14, 2013 at 4:14pm

आदरणीया कुन्ती जी, सादर अभिवादन!

जय सिया राम!

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on June 14, 2013 at 4:13pm

आदरणीय विनीता जी, सादर अभिवादन!

आज समाज भले ही अपने अपने अहम आगे ईश्वर को ना मानने लगा है पर दुःख की घड़ी में सबको भगवान याद आते हैं. दुःख में सुमिरन सब करे......आपकी सार्थक प्रतिक्रिया हेतु आभार!

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on June 14, 2013 at 4:10pm

आदरणीय श्री श्याम नारायण वर्मा जी, जय सिया राम!

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on June 14, 2013 at 4:09pm

आदरणीय श्री विजय मिश्र जी, सादर अभिवादन!

समर्थन हेतु आभार!जय सियाराम जय जय सियाराम 

Comment by vijayashree on June 14, 2013 at 11:58am

जय सियाराम जय जय सियाराम..........

अति सुंदर   

Comment by coontee mukerji on June 14, 2013 at 12:35am

जय सिया राम , बहुत सुंदर रचना जवाहर जी / सादर / कुंती .

Comment by Vinita Shukla on June 13, 2013 at 2:58pm

भक्ति रस में पगी सुंदर रचना. काश समाज के आस्थाहीन लोग, इस भावना को समझें और गृहण करें!

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