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ये भोर
काली रात के बाद

अब भी सिसकती है
यादों के ताजे निशाँ
सूखे ज़ख़्मों को
एक टक ताकती  

उसे नहीं पता
आने वाली शाम और
रात कैसी होगी

पता है तो बस
बीता हुआ कल
वो बीता हुआ कल  
जो निकला था
उसकी कसी हुई मुठ्ठी से
रेत की तरह
देखते देखते
रेत की तरह
भरी दोपहर में
तपते रेगिस्तान में
ज्यों छलती है रेत
मृग मारीचिका की तरह

मृग मारीचिका
जिससे भान होता है
पानी का
हाँ नहीं था वहाँ पानी

पानी
न आखों में
न व्यक्तित्व में

आँखों में थी तो बस
हैवानियत
और व्यक्तिव में
आतंकवाद

भोर ने हाथ रचाए हैं
रक्त से
और बैठी है
श्मशान में
अनसन कर रहे
फरियादियों के साथ

कहती है वो कल था
और ये आज है
मुझे तो ये
ताज़ा निशाँ
सुकून देते हैं
और जख्म हर रोज सूखते हैं
हरे हो होकर

दीप
मौलिक और अप्रकाशित

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Comment

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Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on July 16, 2013 at 12:47pm
आप सभी आदरणीय अग्रजों और सम्मानीय सदस्यों का हृदय की गहराइयों से धन्यवाद
स्नेह यूँ ही बनाए रखिए
समयाभाव और कुछ कारणों से समय कम दे पा रहा हूँ सभी से क्षमा प्रार्थी हूँ
Comment by Parveen Malik on July 15, 2013 at 8:27pm
सन्दीप जी बहुत बढिया ....
Comment by रविकर on July 15, 2013 at 10:12am

रोज रोज की दास्ताँ, हरे-भरे हों घाव |
सूख नहीं पाए कभी, ठांय ठांय हर ठांव ||

सटीक प्रगटीकरण-
शुभकामनाएं आदरणीय संदीप जी-


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 14, 2013 at 9:29pm

वाह ! बधाई.. .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on July 14, 2013 at 9:29pm

एक अलग ही शैली में आपकी रचना , मन मुग्ध हो गया............

Comment by vijay nikore on July 13, 2013 at 4:09am

//कहती है वो कल था
और ये आज है
मुझे तो ये
ताज़ा निशाँ
सुकून देते हैं
और जख्म हर रोज सूखते हैं
हरे हो होकर //

अति सुन्दर अभिव्यक्ति । बहुत ही मार्मिक भाव हैं, आदरणीय।

विजय निकोर

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on July 12, 2013 at 11:01pm

आ0 संदीप भाई जी,
--मुझे तो ये
ताज़ा निशाँ
सुकून देते हैं
और जख्म हर रोज सूखते हैं
हरे हो होकर ... अतिसुन्दर एवं लाजवाब प्रस्तुति। हार्दिक बधाई स्वीकारें। सादर,

Comment by D P Mathur on July 12, 2013 at 8:49pm

पता है तो बस 
बीता हुआ कल
वो बीता हुआ कल  
जो निकला था 
उसकी कसी हुई मुठ्ठी से 
रेत की तरह 

सुन्दर रचना की आपको बधाई !

Comment by Pankaj Trivedi on July 12, 2013 at 7:07pm

सुन्दर प्रस्तुति

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