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लेकिन मेरी बिटिया

बेशक तुमने देखी नही दुनिया 

बेशक तुम अभी नादान हो 

बेशक तुम आसानी से

हो जाती हो प्रभावित अनजानों से भी 

बेशक तुम कर लेती हो विश्वास किसी पर भी 

बेशक तुम भोली हो...मासूम हो 

लेकिन मेरी बिटिया 

होशियार रहना 

ये दुनिया ईतनी अच्छी नहीं है 

ये दुनिया इतनी भरोसे लायक नहीं रह गई है 

जहां उडती  हैं गौरैयाँ खुले आकाश में 

वहीं उड़ते हैं चील-कौवे-गिद्ध भी 

तुम्हे होशियार रहना है गिद्धों से 

और पहचानना है गौरैया के भेष में गिद्धों को...

तभी तुम जी पाओगी

उड़ पाओगी अपनी उडान...

बिना व्यवधान....

(अप्रकाशित मौलिक )

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Comment

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Comment by रविकर on July 15, 2013 at 10:14am

शुभकामनायें आदरणीय-


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 14, 2013 at 9:45pm

व्यावहारिक रचना के लिए हार्दिक बधाई, आदरणीय.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on July 14, 2013 at 9:24pm

आदरणीय सुंदर रचना...........

Comment by Neeraj Nishchal on July 14, 2013 at 8:06pm

bahut sundar

Comment by D P Mathur on July 14, 2013 at 6:26pm

आदरणीय अनवर जी नमस्कार कुछ लाइनों में जवाब देने की कौशिश की है ,
मेरी प्यारी बगीयां की कली,
सदा तुम मुस्कुराओं ,
जीवन पथ की बगीयां में
कभी ना मुरझाओ
लेकिन ये भी याद रखों
हर डाली पर कांटें भी हैं
हवा के झोंके की हिलौरी से
कोई कांटा ना चुभ जायें
इस कोमल सी कली को
जीवन में
कोई दर्द ना मिल जायें
बेटी तुम रहना सचेत ,
कभी ना हो पाओ अचेत,
प्रत्येक पिता के दिल की बात ,उनके दिल का डर एक सीख बनकर शब्दों में ढ़ल आया है !
आपको बधाई !

Comment by Vindu Babu on July 14, 2013 at 5:11pm
ऐसी शिक्षा बेटियों को देनी ही चाहिए आदरणीय।
आज समाज को आप जैसे पिताओं की ही आवश्यकता है।
आपकी बिटिया को ढेरों शुभकामनाएं और आप भी सादर बधाई स्वीकारें महोदय!
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on July 14, 2013 at 4:40pm

जहां उडती  हैं गौरैयाँ खुले आकाश में 

वहीं उड़ते हैं चील-कौवे-गिद्ध भी 

तुम्हे होशियार रहना है गिद्धों से 

और पहचानना है गौरैया के भेष में गिद्धों को...वाह वाह ! अनवर साहब, बच्चों के प्रति दायित्व निर्वाह का

सुन्दर सन्देश देती रचना के लिए हार्दिक बधाई | आपकी रचना ने पुराना गाना याद करा दिया -

"इस बात तो कहनी है हमें इस देश के --------संभल कर रहना अपने घर में छुपे हुए गद्दारों से 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on July 14, 2013 at 3:17pm

जहां उडती  हैं गौरैयाँ खुले आकाश में 

वहीं उड़ते हैं चील-कौवे-गिद्ध भी 

तुम्हे होशियार रहना है गिद्धों से 

और पहचानना है गौरैया के भेष में गिद्धों को............आज के समय के अनुरूप बहुत ज़रूरी शिक्षा.

हार्दिक शुभकामनाएँ 

Comment by Kavita Verma on July 13, 2013 at 2:35pm

sundar seekh bitiya ko ...

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