For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दिल्ली में फिर नादिर

शरीफों में शराफत नहीं

सिंह बकरी सा मिमियाए.

देख के, भारत माता का

आंचल भी शर्माए.

**********

दुष्ट कब समझा है जग में

निश्छल प्रेम की परिभाषा.

अपनी ही लाशों पर लिखोगे

क्या देश की अभिलाषा.

 

लाल पत्थर की दीवारें भी

महफूज़ नहीं रख पाएंगी .

सीमा पर बही रक्त जब

दिल्ली तक तीर आएगी .

 

सत्ता सुख क्षणिक है

सदैव नहीं रह पायेगा.

दिल्ली की चौड़ी सड़कों पर

जब फिर से नादिर आएगा.

 

सत्ता के स्वार्थ में

इतिहास भुला कर बैठे हैं.

तत्क्षण रौशनी के लिए

घर को जला कर बैठे हैं.

 

वंचक है, खुद ही को ठग रहे

दीवाने हैं, ये सत्ता के मलंग है .

अपनी संतती को निगलने वाले

काले विषधर भुजंग हैं .

 

दह में उतरकर भीतर

व्याल बांधना होगा.

तोड़ दन्त विषधर  के

हथेलियों में फन थामना होगा .

 

कवि कर्म है मेरा

तुम्हें जगाता रहता हूँ.

आने वाले कल की

तस्वीर दिखाता रहता हूँ.

 

आँखें बंद कर लेने से

तस्वीर नहीं बदलती है .

दवा कडवी हो कितनी भी

फिर भी निगलनी पड़ती है .

          ..................नीरज कुमार ‘नीर’

मेरी यह कविता पूर्णतः मौलिक एवं अप्रकाशित है .

कुछ शब्दार्थ /भावार्थ :

  1. शरीफ : प्रत्यक्ष में नवाज शरीफ, वैसे सभी लोग जो खुद को सभ्य दिखाते हैं परन्तु अन्दर से कुटिल होते हैं ..
  2. सिंह : भारत में सबसे ज्यादा सिंह है, जंगल का राजा भी और आदमी भी जो सिंह का टाइटल रखते हैं, फिर भी भारत एक कमजोर राष्ट्र है .
  3. भारत माँ का आंचल: माँ आंचल में छुपाकर बच्चों को दूध पिलाती है , वैसे आजकल नहीं पिलाती ये अलग बात है, लेकिन भारत माँ की कल्पना वैसे माँ के रूप में है जो दूध पिलाती है ..
  4. लाल पत्थर की दीवारें : दिल्ली में संसद समेत कई भवन जो लाल पत्थर से बने है ..
  5. नादिर : नादिर शाह, कुख्यात विदेशी आक्रमण कारी जिसने दिल्ली को लूटा एवं लाखों लोगों को क़त्ल किया.
  6. वंचक : ठग
  7. दह : यमुना में वह जगह जहाँ भगवान श्री कृष्ण ने कालिया दमन किया था .

8. व्याल : सर्प 

Views: 672

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 14, 2013 at 2:36pm

आपके प्रस्तुत छंद प्रयास के प्रति सादर भाव रखते हुए शुभकामनाएँ कह रहा हूँ,

बधाई

Comment by shubhra sharma on August 13, 2013 at 10:49am

आदरणीय नीरज जी ,बहुत बढ़िया कविता , सादर बधाई 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on August 12, 2013 at 8:14pm

आदरणीय नीरज कुमार 'नीर' जी 

सामयिक परिपेक्ष्य में बहुत सशक्त प्रस्तुति..

हार्दिक शुभकामनाएँ 

Comment by Neeraj Neer on August 11, 2013 at 7:29pm

आप सब सुधि जनों का ह्रदय से आभार ..


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 11, 2013 at 2:34pm

देश की वर्तमान स्थिति पे सुन्दर रचना , बधाई !!!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on August 11, 2013 at 2:07pm

सुंदर रचना अभिव्यक्ति, बधाई आदरणीय नीरज जी

Comment by annapurna bajpai on August 11, 2013 at 1:33pm

दह में उतरकर भीतर

व्याल बांधना होगा.

तोड़ दन्त विषधर  के

हथेलियों में फन थामना होगा ...................... बिलकुल सही कहा आपने आदरणीय नीरज जी ।

 

कवि कर्म है मेरा

तुम्हें जगाता रहता हूँ.

आने वाले कल की

तस्वीर दिखाता रहता हूँ......................... एकदम सही बात है जब  कवियों की लेखनी भी आग उगलेगी तब ही जागृति आएगी ।

 

आँखें बंद कर लेने से

तस्वीर नहीं बदलती है .

दवा कडवी हो कितनी भी

फिर भी निगलनी पड़ती है........................... बहुत सही  , भाव पूर्ण और घाव करें गंभीर । आपको बहुत बधाई । आ० नीरज भाई जी ।

Comment by अरुन 'अनन्त' on August 11, 2013 at 12:50pm

आधुनिक परिस्थिति का सुन्दर वर्णन किया है नीरज भाई हार्दिक बधाई स्वीकारें

Comment by विजय मिश्र on August 10, 2013 at 4:44pm
नीरजजी ,निःसंदेह कवि कर्म और सचेतन धर्म का निर्वाह श्रेष्ठ राष्ट्र निष्ठा संग आपने किया है.स्पष्ट चेतावनी भी दियी है ,दृष्टान्त भी दिया , ईश्वर का आह्वान भी किया .
जाग्रत संदर्भ पर सारगर्भित रचना हेतु आदर एवं आभार .
Comment by Ayub Khan "BismiL" on August 10, 2013 at 1:45pm

bahut Umdaaa

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
4 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Friday
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
Friday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"सार्थक है आपका सुझाव "
Tuesday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभाजी ।  इसमें कुछ कमी हो सकती है लेकिन इस प्रकार के आयोजन शहरों…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, बिना सोचे बोलने के परिणाम पर सुन्दर और संतुलित लघुकथा…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"अमराई में उत्सव छाया,कोयल को न्यौता भिजवाया। मौसम बदले कपड़े -लत्ते, लगे झूमने पत्ते-…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"ठण्ड गई तो फागुन आया। जन मानस में खुशियाँ लाया॥ आम  लगे सब हैं बौराने। पंछी गाते सुर में…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service