For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

//गज़ल// सार रेशमी डोरी में- कल्पना रामानी

12122222221212222

 

छिपा हुआ रक्षाबंधन का, सार रेशमी डोरी में।

गुंथा हुआ भाई बहना का, प्यार रेशमी डोरी में।

 

कहीं बसे बेटी लेकिन, हर साल मायके आ जाती,

सजी धजी लेकर सारा, अधिकार रेशमी डोरी में।

 

बड़ा सबल होता यह रिश्ता, स्वस्थ भाव, बंधन पावन,

गहन विचारों का होता, आधार रेशमी डोरी में।

 

विदा बहन होती जब कोई, एक वायदा ले जाती,

जुड़े रहेंगे मन के सारे, तार रेशमी डोरी में।

 

विनय यही हों दृढ़ जीवन में, ये सदैव रिश्ते नाते,

रहे चमकता सतरंगी, संसार रेशमी डोरी में।  

 

 मौलिक व अप्रकाशित

 

कल्पना रामानी

Views: 1073

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by कल्पना रामानी on September 1, 2013 at 9:52am

आदरणीय सौरभ जी, मैं भी आपके विचार से पूरी तरह से सहमत हूँ। इस तरह की रचनाएँ मेहनत अधिक माँगती हैं, लेकिन नया पाने की ललक में वो बात गौण हो जाती है। पाठक भी तो नवीनता ही चाहते हैं न। और अगर कहन में अटकाव या असुविधा न हो तो यह दोष भी गौण है। इस दोष पर तो मेरा ध्यान टिप्पणी के बाद ही गया। पढ़ने में असुविधा होती तो उसी समय बदलाव हो जाता।

आपकी टिप्पणी से मेरे साथ साथ समस्त जिज्ञासु पाठकों को भी अवश्य लाभ होगा।

आपका हृदय से आभार। सादर।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 27, 2013 at 12:45am

आपकी ग़ज़ल जिस सहुलियत की मांग करती है वह आपने उसे दी. यह तो हुई पहली बात आदरणीया कल्पनाजी.

बह्र की अपनी सूची है लेकिन क्या मिसरे उसके अलावे अन्य विन्यास में नहीं होने चाहिये ? यह प्रश्न अनावश्यक है, यदि हर मिसरे एक विन्यास पर हों और उनकी गेयता और लय में बाधा न आये. आगे, सोचने, समझने और निभाने की बात है. 

आपकी ग़ज़ल प्रस्तुति कमाल की हुई है.  

सादर बधाइयाँ.. .

ऐबे तनाफ़ुर को लेकर इसी मंच पर बहुत लम्बी वार्ताएँ हुई हैं. हम उनका लाभ उठा सकते हैं. यह काव्य संप्रेषण में एक दशा है जिसका होना परिस्थितियों पर निर्भर करता है. 

सादर

Comment by कल्पना रामानी on August 22, 2013 at 10:22pm

केतन जी, मैंने जिस बहर में गजल कही है, वो साथ में ही संलग्न है।  जहाँ तक मुझे मालूम है बहर के निश्चित प्रकार नहीं होते। हम जिस छंद या बहर में मतले का शेर कहते हैं उसका निर्वाह पूरी गजल में होना चाहिए। प्रवाह बाधित न हो यह पहली शर्त होती है। जो दोष  आदरणीय शिज्जु जी ने बताया है, उस तरफ मेरा ध्यान भी टिप्पणी के बाद ही गया है।उनकी शंका बिलकुल सही है। लेकिन गजल कहते समय मुझे कोई अटकाव महसूस नहीं हुआ इसलिए ध्यान भी नहीं गया। इसमें सुधार की तो कोई गुंजाइश ही नहीं है। इसे या तो यूँ ही रहने दिया जाए या हटा दिया जाए। तीसरा कोई विकल्प नहीं है। बाकी बहर के बारे में जब गुरुजन टिप्पणी करेंगे तभी स्पष्ट हो सकेगा। मुझे स्वयं अधिक अनुभव नहीं है। अभी सीख ही रही हूँ। सादर

 

Comment by कल्पना रामानी on August 22, 2013 at 10:12pm

आदरणीय केवल प्रसाद जी,  विनीता जी, केतन जी, जितेंद्र जी, आप सबका हार्दिक आभार

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on August 21, 2013 at 3:58am

विदा बहन होती जब कोई, एक वायदा ले जाती,

जुड़े रहेंगे मन के सारे, तार रेशमी डोरी में।............बहुत ही हृदयस्पर्शी शेर

रक्षाबंधन पर्व पर गजल प्रस्तुति हेतु आपको बहुत बधाई आदरणीया कल्पना जी 

Comment by Ketan Parmar on August 20, 2013 at 11:11pm
sawaal ka javaab kalpana didi se hi apekshit hai. didi rakshabandhan ki subhkamnaaye
Comment by Ketan Parmar on August 20, 2013 at 11:10pm
bhaav achhe hai magar behr samajh nahi aayi didi roshani daale uspar
Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 20, 2013 at 10:04pm

आ0 रामानी दी जी,  सादर प्रणाम!     एक सुन्दर, कोमल, स्नेह से परिपूर्ण पवित्र पर्व पर लाजवाब संदेश और भाव भरे हैं।  आपको तहेदिल बहुत-बहुत बधाई, लेकिन बह्र के सम्बन्ध में वरिष्ठजन ही मार्ग दर्शन करें तो बेहतर होगा। सादर  

Comment by Vinita Shukla on August 20, 2013 at 9:54pm

बहन, भाई के प्रेम से पगी, सुंदर, समसामयिक पोस्ट. बधाई आदरणीया.

Comment by कल्पना रामानी on August 20, 2013 at 9:37pm

आदरणीया प्राची जी, सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद आपका

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
6 hours ago
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Tuesday
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service