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चाँद हौले से मुस्का दिया - कविता

अंधकार गहरा चला अब  

सितारों से भर चला नभ  

चाँद हौले से मुस्का दिया

अप्रतिम अलौकिक सुंदरता ...................

 

सुंदरी की खुली अलकें सी

चाँदनी भी छिटकने लगी

कण कण दुग्ध मे नहाया सा

प्रफुल्लित हो चला मन

लगता था जो पराया सा ........................

 

तप्त धरा सी वो

पाई जिसने शीतलता  

नीरवता तोड़ता विहग

आवरण जो असत्य का ,

अंधकार वो अहम का

हौले हौले .......................

चेतना लौटी प्रबुद्धता आई

नैसर्गिक अविचलता लाई

प्रेम और विश्वास का

स्नेह और उल्लास का

सागर लेने लगा हिलोरें....................................

अप्रकाशित एवं मौलिक  

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Comment

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मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 6, 2013 at 11:25am

आदरणीया अन्नपूर्णा जी, रचना एक दृश्य निर्मित करती है, इस खुबसूरत रचना पर बहुत बहुत बधाई । 

Comment by Ashish Srivastava on September 6, 2013 at 11:11am

सुंदरी की खुली अलकें सी

चाँदनी भी छिटकने लगी

कण कण दुग्ध मे नहाया सा

प्रफुल्लित हो चला मन

लगता था जो पराया सा

आदरणीय अन्नपूर्णा जी बधाई हो 

Comment by रविकर on September 6, 2013 at 10:59am

बढ़िया रचना-
आभार आदरेया-

Comment by aman kumar on September 6, 2013 at 8:44am

आपको बधाई !महीने का  सक्रीय सदस्य सम्मान के लिए और रचना के लिए , 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 6, 2013 at 7:36am

आदरणीया आन्नपूर्णा जी , सुन्दर रचना के लिये बधाई !!

Comment by Meena Pathak on September 6, 2013 at 12:00am

बहुत बहुत सुन्दर भाव आअ० अन्नपूर्ण जी .. हार्दिक बधाई स्वीकारें

Comment by बृजेश नीरज on September 5, 2013 at 11:08pm

सुंदर अभिव्यक्ति! आपको हार्दिक बधाई!

Comment by MAHIMA SHREE on September 5, 2013 at 10:44pm

सुंदर अभिव्यक्ति आदरणीया ..आपको महीने का  सक्रीय सदस्य सम्मान से सम्मानित होने केलिए बधाई

Comment by annapurna bajpai on September 5, 2013 at 10:07pm
आदरणीय केवल भाई जी , राम शिरोमणि जी , जितेंद्र जी आप सबका हार्दिक आभार ।
Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on September 5, 2013 at 8:45pm

सुंदरी की खुली अलकें सी

चाँदनी भी छिटकने लगी

कण कण दुग्ध मे नहाया सा

प्रफुल्लित हो चला मन

लगता था जो पराया सा .......................अति सुंदर भाव से सुसज्जित पंक्तियाँ

बहुत उम्दा रचना , बहुत बहुत बधाई आदरणीया अन्नपूर्णा जी.

 

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