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चारा पाती गाय, हुई रौनक गौशाले

गौशाले में गाय खुश, बछिया दिखे प्रसन्न |
बछिया के ताऊ खफा, छोड़ बैठते अन्न |


छोड़ बैठते अन्न, सदा चारा ही खाया |
पर निर्णय आसन्न, जेल उनको पहुँचाया |


करते गधे विलाप, फायदा लेने वाले |
चारा पाती गाय, हुई रौनक गौशाले ||

मौलिक / अप्रकाशित

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Comment

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Comment by MAHIMA SHREE on October 1, 2013 at 10:13pm

क्या बात है ... आदरणीय पढ़ते ही मुस्करा पड़ी .. बधाई ..ताऊ तो जेल गए :)) गायें भी खुश .. हम भी खुश

Comment by बृजेश नीरज on October 1, 2013 at 5:35pm

 बहुत ही सुन्दरता से कटाक्ष किया है आपने! आदरणीय मेरी हार्दिक बधाई स्वीकारें!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 1, 2013 at 4:29pm

कुण्डलिया में सहजता से सुन्दर कटाक्ष 

हार्दिक बधाई इस प्रस्तुति पर 

Comment by अरुन 'अनन्त' on October 1, 2013 at 3:43pm

वाह वाह आदरणीय रविकर सर वाह बहुत ही सुन्दर कटाक्ष बहुत बहुत बधाई स्वीकारें

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on October 1, 2013 at 2:34pm

आदरणीय रविकर सर सादर प्रणाम

बेहतरीन व्यंग साधा है आपने जय हो

इस सुन्दर कुण्डलिया छंद हेतु सादर बधाई आपको

Comment by रविकर on October 1, 2013 at 2:28pm

आदरणीय / आदरणीया आभार-
एक यह भी है-
सादर


वारे न्यारे कब किये, कब का चारा साफ़ |
पर कोई चारा नहीं, कोर्ट करे ना माफ़ |

कोर्ट करे ना माफ़, दिखे करनी सी भरनी |
गौशाला आबाद, ,पार करले वैतरणी |

फटता अध्यादेश, कहाँ अब जाय पुकारे |
गैयों में आनंद, विलापें गधे दुवारे |

Comment by विजय मिश्र on October 1, 2013 at 1:43pm
वाह ! वाह !! वाह !!! वाह !!!!

समयानुकूल रचना , श्रेष्ठ कटाक्ष -- "करते गधे विलाप, ..... " -- आनंद आ गया रविकरजी
Comment by बसंत नेमा on October 1, 2013 at 12:10pm

सुन्दर अति सुन्दर आ0 रविकर जी  बधाई

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on October 1, 2013 at 9:50am

अति सुंदर कुंडली रचना, बधाई स्वीकारें आदरणीय रविकर जी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 1, 2013 at 8:22am

आदरणीय रविकर जी , दिली दाद कुबूल करें , आप किसी भी विषय सुन्दर कुंडलिया लिखने मे माहिर हैं !! वाह !!

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