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पड़े अनंत उपाय, किन्तु पहले शौचाला-

चित की शुचिता के लिए, नित्य कर्म निबटाय |
ध्यान मग्न हो जाइये, पड़े अनंत उपाय |


पड़े अनंत उपाय, किन्तु पहले शौचाला |
पढ़ देवा का अर्थ, हमेशा देनेवाला |


रविकर जीवन व्यस्त, करे कविता जनहित की |
आत्मोत्थान उपाय, करेगी शुचिता चित की |

मौलिक /अप्रकाशित

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Comment by Meena Pathak on October 6, 2013 at 3:57pm

बहुत सुन्दर प्रस्तुति आ० रविकर जी .. बधाई 

Comment by अरुन 'अनन्त' on October 6, 2013 at 2:54pm

आदरणीय रविकर सर बहुत सुदर कुण्डलिया छंद हार्दिक बधाई स्वीकारें.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 6, 2013 at 9:58am

अच्छी प्रस्तुति 

बधाई आदरणीय रविकर जी । 

Comment by vijay nikore on October 6, 2013 at 2:53am

बहुत सुन्दर भाव हैं...बधाई।

 

सादर,

विजय निकोर

Comment by Sushil.Joshi on October 6, 2013 at 2:40am

बेहद सुंदर कुण्डलिया आदरणीय रविकर जी..... बधाई....

Comment by वेदिका on October 5, 2013 at 11:36pm

बहुत सुंदर कुण्डलिया छ्ंद आदरणीय!

Comment by annapurna bajpai on October 5, 2013 at 10:52pm

आदरणीय रविकर जी बढ़िया रचना , बधाई आपको । 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 5, 2013 at 10:03pm

आदरणीय रविकर भाई , बहुत सुन्दर रचना !! हार्दिक बधाई !!

Comment by डॉ. अनुराग सैनी on October 5, 2013 at 9:50pm

बहुत खूब सर ! आपकी तो बात ही निराली है ! हार्दिक बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on October 5, 2013 at 9:03pm

बहुत बढ़िया आदरणीय रविकर सर बधाई स्वीकार करें

कृपया ध्यान दे...

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