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ग़ज़ल : सूखते नल के आँसू टपकने लगे

बह्र : २१२ २१२ २१२ २१२

 

सूखते नल के आँसू टपकने लगे

देख छागल के आँसू टपकने लगे

 

भूख से चूक पत्थर गिरे याँ वहाँ

देखकर फल के आँसू टपकने लगे

 

था हवा की नज़र में तो बरसा नहीं

किंतु बादल के आँसू टपकने लगे

 

आइने ने कहा कुछ नहीं इसलिए

रात काजल के आँसू टपकने लगे

 

घास कुहरे से शब भर निहत्थे लड़ी

देख जंगल के आँसू टपकने लगे

----------

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 698

Comment

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 16, 2013 at 2:50pm

आदरणीय धर्मेन्द्रजी, श्रीमद्भग्वद्गीता में भगवान् कहते हैं न ..

निर्ममो निरंहकारः स शान्तिम् अधिगच्छति.. .

शुभ-शुभ

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on November 16, 2013 at 2:29pm

नीलेश जी, राम शिरोमणि जी, अरुण जी, सुशील जी, शिज्जू जी, अनन्त जी, गिरिराज जी, उमेश जी, राजेश कुमारी जी, गोपाल नारायण जी एवं अन्नपूर्णा जी, ग़ज़ल पसंद करने के लिए आप सभी का आभारी हूँ 

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on November 16, 2013 at 2:26pm

आदरणीय सौरभ जी, आपकी बेबाक राय के लिए तह-ए-दिल से शुक्रगुज़ार हूँ। भविष्य में भी आपसे इसी निर्मम स्नेह की अपेक्षा रहेगी।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 13, 2013 at 11:36pm

भाई जी .. रदीफ़ जो लिया उसके लिए तो वाह वाह !

लेकिन जो कुछ हुआ या हो पाया है, उसपर.. आँसू टपकने लगे. .. बुरा न मानियेगा. .. .

जय हो..

Comment by Nilesh Shevgaonkar on November 10, 2013 at 9:44pm

वाह वाह .. क्या ख़ूब ग़ज़ल कही है ... ढेरों बधाईयाँ 

Comment by ram shiromani pathak on November 10, 2013 at 8:12pm

आदरणीय धर्मेन्द्र जी,सुन्दर गज़ल के लिये बधाई.............


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on November 10, 2013 at 9:29am

आदरणीय धर्मेन्द्र जी, हमेशा की तरह खूबसूरत ग़ज़ल सुनाने के लिए आभार................

Comment by Sushil.Joshi on November 9, 2013 at 8:48pm

इस शानदार प्रस्तुति हेतु बहुत बहुत बधाई आ0 धर्मेन्द्र जी.....


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on November 9, 2013 at 4:50pm

बहुत बढ़िया आदरणीय धर्मेन्द्र जी बधाई स्वीकार करें

Comment by अरुन 'अनन्त' on November 9, 2013 at 3:35pm

वाह वाह आदरणीय क्या कहने लाजवाब बेहतरीन ग़ज़ल ढेरों बधाइयाँ स्वीकारें

कृपया ध्यान दे...

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